पूर्व डीएम-एसपी समेत 18 अफसरों की परीक्षा
आस्था से लेकर नेतृत्व तक 34 सवाल
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मंगलवार से शुरू हुए साक्षात्कार में पूर्व डीएम, एसपी, आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के साथ सैन्य और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। 5,200 से अधिक आवेदनों में से 18 अभ्यर्थियों को अंतिम साक्षात्कार के लिए चुना गया है।
पहले दिन पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय, जौनपुर के पूर्व जिलाधिकारी दिनेश चंद्र और अयोध्या के पूर्व डीएम योगेश्वर राम मिश्रा समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों का साक्षात्कार हुआ। बंद कमरे में हुए साक्षात्कार में अभ्यर्थियों से मंदिर की व्यवस्था, श्रद्धालुओं की भीड़ संभालने, बड़े आयोजनों के प्रबंधन, नेतृत्व क्षमता और धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों से जुड़े सवाल पूछे गए।
चयन प्रक्रिया के लिए 34 सवालों का प्रारूप तैयार किया गया है। अभ्यर्थियों से उनके प्रशासनिक अनुभव के साथ यह भी पूछा गया कि उन्होंने कितने बड़े आयोजनों का प्रबंधन किया है, कितने लोगों की भीड़ संभाली और कितने कर्मचारियों का नेतृत्व किया। राम मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्वों पर लाखों की भीड़ को देखते हुए भीड़ प्रबंधन को अहम कसौटी माना गया है।
साक्षात्कार में अभ्यर्थियों से भगवान राम और हिंदू धार्मिक परंपराओं के प्रति उनकी आस्था तथा मंदिर के प्रति दृष्टिकोण पर भी सवाल पूछे गए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों से उनके धार्मिक रीति-रिवाजों, खान-पान और व्यक्तिगत धार्मिक आचरण से जुड़े प्रश्न भी किए गए।
तीन सदस्यीय चयन समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावड़े शामिल हैं। समिति 18 अभ्यर्थियों में से तीन नामों का पैनल तैयार करेगी और इसे दो सितंबर से पहले ट्रस्ट को सौंपना है। अंतिम नियुक्ति का फैसला ट्रस्ट करेगा।
सीईओ की नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है, जब राम मंदिर को मिले दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जांच चल रही है। ट्रस्ट का उद्देश्य पूर्णकालिक सीईओ के जरिए मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही, पारदर्शिता और पेशेवर प्रबंधन को मजबूत करना बताया जा रहा है।


