तीन सिपाही निलंबित; छह पुलिसकर्मी लाइन हाजिर
लखनऊ। साइबर ठगी के बड़े मामले में लखनऊ पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका के बाद हुई जांच में सामने आया कि साइबर क्राइम सेल की टीम ने छापेमारी के दौरान 122 संदिग्धों को पकड़ा था, लेकिन इनमें से तीन को कथित तौर पर छोड़ दिया गया और केवल 119 की गिरफ्तारी दर्ज की गई।
मामला सामने आने के बाद कमिश्नरेट पुलिस ने प्राथमिक जांच के आधार पर तीन सिपाहियों वसीम, जितेंद्र और श्रीकांत को निलंबित कर दिया, जबकि दो दारोगा समेत छह पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है। पुलिस के मुताबिक अन्य कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
यह मामला समिट बिल्डिंग में चल रहे साइबर ठगी के कॉल सेंटर पर हुई छापेमारी से जुड़ा है। पुलिस ने कार्रवाई में 119 लोगों को गिरफ्तार कर बड़ी संख्या में लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए थे। गिरोह पर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर अरबों रुपये की साइबर ठगी करने का आरोप था।
जेल भेजी गई एक महिला आरोपी ने पुलिस के गुडवर्क पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि मौके से तीन आरोपियों को छोड़ दिया गया और उनसे अनुचित लाभ लिया गया। इसके बाद उसने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट की सख्ती के बाद कमिश्नरेट ने एसीपी गोमतीनगर रत्नेश सिंह को जांच सौंपी।
जांच में सामने आए वीडियो साक्ष्यों में तीनों निलंबित सिपाहियों को कथित तौर पर तीन जालसाजों को लिफ्ट में ले जाकर अलग से बातचीत करते देखा गया। वहीं, दूसरी पुलिस टीम छापेमारी में बरामद सामान की कार्रवाई पूरी कर रही थी। छोड़े गए तीनों लोगों का बरामदगी की फर्द या अन्य पुलिस दस्तावेजों में कोई उल्लेख नहीं मिला।
पुलिस उपायुक्त अपराध अनिल यादव ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश पर जांच कराई गई थी। प्राथमिक जांच में कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध मिलने पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि जांच अभी जारी है और किसी अन्य पुलिसकर्मी की भूमिका सामने आने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।


