नई दिल्ली। बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के परिणामों ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट से आया, जहां जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,324 वोटों के बड़े अंतर से हराकर भाजपा के मजबूत गढ़ में सेंध लगा दी। बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पारंपरिक सीट रही है, जहां से वह लगातार पांच बार विधायक चुने गए थे। उनके राज्यसभा सदस्य बनने के बाद इस सीट पर उपचुनाव कराया गया।
बांकीपुर में प्रशांत किशोर को 64,151 वोट (49.23 प्रतिशत) मिले, जबकि भाजपा के नीरज कुमार को 44,827 वोट (34.40 प्रतिशत) प्राप्त हुए। राजद की रेखा कुमारी 14,273 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहीं। उल्लेखनीय बात यह रही कि भाजपा और राजद को मिले कुल वोट भी प्रशांत किशोर के अकेले वोटों से 5,051 कम रहे। चुनाव में कुल 1,30,313 वोट पड़े और लगभग हर दूसरा मतदाता प्रशांत किशोर के पक्ष में गया। जीत के बाद उन्होंने कहा कि “बिहारी सिर्फ मजदूर बनने के लिए पैदा नहीं हुए हैं। बिहार बेहतर नेतृत्व का हकदार है।” उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि क्षेत्र में जल्द बदलाव दिखाई देगा।
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। भाजपा ने इस सीट पर पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में कांग्रेस को 66,757 वोट, भाजपा को 60,741 वोट और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के उम्मीदवार दामोदर यादव ‘मंडल’ को 22,527 वोट मिले। दामोदर यादव के उल्लेखनीय वोटों ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया।
उधर, गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा ने अपना गढ़ बचाते हुए सतेन्द्रभाई (सतीश) पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,630 वोटों के भारी अंतर से पराजित किया। इस जीत के साथ भाजपा ने गुजरात में अपनी राजनीतिक बढ़त कायम रखी।
तीनों सीटों पर 30 जुलाई को मतदान हुआ था। मतगणना के दौरान बिहार की बांकीपुर सीट पर चुनाव आयोग की वेबसाइट पर राउंड की संख्या को लेकर तकनीकी गड़बड़ी भी देखने को मिली, हालांकि बाद में अंतिम परिणाम जारी कर दिए गए।उपचुनाव परिणाम केवल तीन सीटों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि 2027 के चुनावी माहौल की शुरुआती तस्वीर भी पेश करते हैं। वर्ष 2027 में राष्ट्रपति चुनाव, राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव और उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, गोवा तथा मणिपुर सहित सात राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें सबसे अधिक नजर उत्तर प्रदेश पर रहेगी, क्योंकि देश की सबसे बड़ी विधानसभा का जनादेश राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है।
ऐसे में बिहार के बांकीपुर में भाजपा की हार, मध्य प्रदेश में कांग्रेस की जीत और गुजरात में भाजपा की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 2027 के महासंग्राम से पहले राजनीतिक दलों की रणनीति और चुनावी समीकरण तेजी से बदलने वाले हैं।


