मुंबई: महाराष्ट्र (Maharashtra) में धर्मांतरण विरोधी कानून (Anti-conversion law) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) की मंजूरी मिलने और आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद लागू हो गया है। दोषी पाए जाने पर 7 से 10 साल तक की जेल हो सकती है। महाराष्ट्र में अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए ‘महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2026’ आधिकारिक रूप से लागू हो गया है।
अधिनियम के तहत बल, दबाव, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, गलत बयानी या शादी से जुड़े धोखे के जरिए कराए गए धर्म परिवर्तन को दंडनीय अपराध बनाया गया है। महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक, 2026 को मार्च में बजट सत्र के दौरान राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों ने पारित किया था। इसके साथ ही अब राज्य में ये कानून प्रभावी हो गया है।
देश के 11 राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून प्रभावी होने के बाद अब यह महाराष्ट्र में भी लागू हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी और सरकारी गजट छपने के बाद 30 जुलाई से राज्य में आधिकारिक रूप से लागू हो गया है।अब राज्य में नए कानून के नियमों के मुताबिक गैरकानूनी धर्मांतरण के मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए 7 साल तक जेल की सजा का प्रावधान है।
नए कानून के प्रावधानों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से दूसरा धर्म अपनाना चाहता है, तो उसे धर्मांतरण से कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित सूचना देनी होगी। कानून का उल्लंघन यदि बार-बार होता है तो यह अपराध करने पर 10 साल तक की कैद और 7 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
अधिनियम के तहत बल, दबाव, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, प्रलोभन, गलत बयानी या शादी से जुड़े धोखे के जरिए कराए गए धर्म परिवर्तन को दंडनीय अपराध बनाया गया है। इस कानून के तहत पीड़ित के माता-पिता, भाई-बहन और अन्य निकट संबंधियों को भी शिकायत दर्ज कराने का अधिकार दिया गया है।


