होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा, तनाव चरम पर
वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि तेहरान के पास अब केवल दो विकल्प बचे हैं—अमेरिका से समझौता करे या पूरी तरह सरेंडर कर दे। ट्रम्प ने दावा किया कि ईरानी नेतृत्व बातचीत को लेकर दोहरा रवैया अपना रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि “ईरान पहले बातचीत के लिए भीख मांगता है, लेकिन फिर सार्वजनिक रूप से कहता है कि अमेरिका से कोई बातचीत नहीं हो रही।”
ट्रम्प ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब अमेरिका के नियंत्रण में है और अमेरिकी नौसेना की अनुमति के बिना वहां से कोई जहाज नहीं गुजर सकता। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।
उधर, ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने हमला किया तो खाड़ी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि दुनिया में जहां-जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं, उन्हें निशाना बनाया जाएगा। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने कहा कि उसके लड़ाके किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वहीं ईरान ने होर्मुज के ऊपर उड़ रहे एक MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराने का भी दावा किया है।
इस बीच ट्रम्प ने कहा कि पश्चिम एशिया के कई देशों की ओर से बातचीत और समझौते के प्रस्ताव मिलने के बाद अमेरिका ने फिलहाल ईरान पर प्रस्तावित हमला टाल दिया है। उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से भी बातचीत की, जिसमें दोनों नेताओं ने तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि दुनिया को तेल और गैस की आपूर्ति के लिए केवल होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और वैकल्पिक समुद्री मार्ग विकसित किए जाने चाहिए। वहीं OPEC+ देशों ने सितंबर से तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है ताकि वैश्विक बाजार में आपूर्ति बनी रहे।
यमन के हूती विद्रोहियों की धमकी के बाद सऊदी अरब के छह सुपरटैंकरों ने अपना समुद्री मार्ग बदल दिया है। दूसरी ओर अमेरिकी सैन्य विश्लेषकों से ईरान पर दबाव बढ़ाने के नए विकल्प तलाशने को कहा गया है। इन घटनाक्रमों ने संकेत दिए हैं कि फिलहाल सीधी जंग टली जरूर है, लेकिन पश्चिम एशिया में सैन्य और कूटनीतिक तनाव अभी भी चरम पर बना हुआ है।


