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Saturday, August 1, 2026

कपिल मुनि आश्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब, रुद्राभिषेक से गूंजा शिवालय

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कम्पिल: सतयुगकालीन तपोभूमि में श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक, महर्षि कपिल की तपस्या और राजा सगर की कथा से जुड़ी है पौराणिक महिमा

कम्पिल, फर्रुखाबाद। सावन मास के तीसरे दिन शनिवार को प्राचीन तीर्थ नगरी कम्पिल स्थित सतयुगकालीन कपिल मुनि आश्रम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही भगवान शिव के जयघोष और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने प्राचीन शिवलिंग का रुद्राभिषेक, जलाभिषेक एवं दुग्धाभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना की। पूरे सावन मास में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु इस पवित्र धाम में दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं।

मंदिर महंत श्री श्री आनंद गिरी महाराज के शिष्य महाराज सुशील ठाकुर ने बताया कपिल मुनि ने अपनी माता देवहूति को सांख्य दर्शन (आध्यात्मिक ज्ञान) का उपदेश दिया था धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में कम्पिल, जिसे कम्पिल्य के नाम से जाना जाता था, महान तपस्वी महर्षि कपिल की तपोभूमि रही है। कहा जाता है कि महर्षि कपिल ने इसी स्थान पर हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। आश्रम के गर्भगृह में स्थापित प्राचीन शिवलिंग आज भी श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर मनोकामनाएं मांगते हैं।

कपिल मुनि भारतीय दर्शन के सांख्य सिद्धांत के प्रवर्तक माने जाते हैं। उनका संदेश था कि “मनुष्य का वास्तविक सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मज्ञान और ईश्वर की अनुभूति में है।” उनके विचार आज भी ज्ञान, विवेक और आत्मबोध की प्रेरणा देते हैं।

आश्रम की महिमा राजा सगर के अश्वमेध यज्ञ से जुड़ी पौराणिक कथा के कारण भी विशेष मानी जाती है। मान्यता है कि देवराज इंद्र ने यज्ञ का अश्व चुराकर कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया था। जब राजा सगर के 60 हजार पुत्र घोड़े की खोज करते हुए वहां पहुंचे तो उन्होंने ध्यानमग्न महर्षि कपिल पर ही चोरी का आरोप लगा दिया। अपमान से क्रोधित होकर महर्षि कपिल के तेज से सभी भस्म हो गए। बाद में राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं और उनके पवित्र जल के स्पर्श से राजा सगर के पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ।

सावन मास में कपिल मुनि आश्रम केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, दर्शन और प्राचीन विरासत का जीवंत प्रतीक भी बना हुआ है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां भगवान शिव और महर्षि कपिल की कृपा से जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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