एसओजी, सर्विलांस और थाना पुलिस के हाथ खाली
न्याय की आस में टकटकी लगाए परिजन
फर्रुखाबाद |
थाना जहानगंज क्षेत्र के कोरीखेड़ा गांव में 10 वर्षीय मासूम आशुतोष की हत्या का मामला सात महीने बाद भी रहस्य बना हुआ है। दिसंबर 2025 में घर से लापता हुए बालक का शव गांव से करीब 600 मीटर दूर आलू के खेत में संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ था। परिजनों ने शुरू से ही हत्या की आशंका जताई थी, लेकिन इतने लंबे समय के बाद भी पुलिस आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी है। मामले का खुलासा न होने से परिजनों में निराशा और ग्रामीणों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
घटना के बाद पुलिस अधीक्षक आरती सिंह के निर्देशन में थाना पुलिस, एसओजी और सर्विलांस टीम को जांच में लगाया गया। फॉरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए, डॉग स्क्वायड की मदद ली गई और कई संदिग्धों से पूछताछ भी की गई। इसके बावजूद जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश राय को लाइन हाजिर भी किया गया, लेकिन इससे भी विवेचना की रफ्तार नहीं बढ़ सकी और हत्याकांड आज भी अनसुलझा बना हुआ है।
वर्तमान में थाना प्रभारी पूनम अवस्थी के कार्यकाल में भी हत्याकांड का खुलासा नहीं हो पा रहा है। पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने समय-समय पर विभिन्न स्तरों पर टीमों का गठन कर जांच के निर्देश दिए, लेकिन अब तक मासूम के हत्यारे कानून की पकड़ से बाहर हैं। ऐसे में एसओजी, सर्विलांस और स्थानीय थाना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। जिले के चर्चित मामलों में शामिल इस हत्याकांड का अब तक खुलासा न होना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया था, उसका आज तक पर्दाफाश न होना बेहद चिंताजनक है। लोगों का मानना है कि यदि शुरुआत से ही वैज्ञानिक, तकनीकी और साक्ष्य आधारित जांच को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाता तो संभवतः आरोपियों तक पहुंचा जा सकता था। अब क्षेत्र के लोगों की निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना अभी जारी है और उपलब्ध सभी साक्ष्यों के आधार पर जांच की जा रही है। वहीं, परिजनों और क्षेत्रीय नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस बहुचर्चित हत्याकांड की निष्पक्ष, प्रभावी और समयबद्ध जांच कर दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए, ताकि मासूम आशुतोष को न्याय और पीड़ित परिवार को इंसाफ मिल सके।


