बाढ़ का खतरा गहराया; प्रशासन सतर्क, घाटों पर बढ़ाई निगरानी
फर्रुखाबाद। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और गंगा के ऊपरी बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण जिले में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार सुबह 9 बजे गंगा का जलस्तर 136.20 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी बिंदु के बेहद करीब पहुंच चुका है। जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से गंगा किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है और संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासन भी सतर्क हो गया है।
सिंचाई विभाग के अनुसार शनिवार को हरिद्वार से 66,192 क्यूसेक, बिजनौर से 66,021 क्यूसेक तथा नरौरा बैराज से 53,125 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। इसके चलते फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। यदि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो निचले इलाकों में पानी पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि फिलहाल किसी भी गांव में बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन गंगा के तटवर्ती गांवों के ग्रामीण स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। लोग आवश्यक सामान सुरक्षित स्थानों पर रखने और संभावित बाढ़ से बचाव की तैयारियों में भी जुटने लगे हैं।
शहर के प्रमुख धार्मिक स्थल पांचाल घाट पर गंगा का जलस्तर बढ़ने से पक्का घाट पहले ही जलमग्न हो चुका है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने खतरे के निशान वाली लाल झंडियां और चेतावनी संकेत लगा दिए हैं। साथ ही लोगों से नदी के तेज बहाव वाले क्षेत्र में जाने और गहरे पानी में स्नान न करने की अपील की जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि गंगा के जलस्तर पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है। बाढ़ चौकियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं और जलस्तर में और वृद्धि होने की स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
मानसून के इस दौर में गंगा का लगातार बढ़ता जलस्तर जिले के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। यदि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहा और बांधों से पानी छोड़ा जाता रहा, तो आने वाले दिनों में बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने तथा केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है।


