अमेरिका ने कथित जबरन श्रम चिंताओं पर भारत को कम टैरिफ वाली श्रेणी में रखा है। भारत सरकार के लगातार प्रयासों के कारण यह अतिरिक्त शुल्क 12.5 फीसदी के बजाय 10 फीसदी तय हुआ है। संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने 23 जुलाई को अंतिम उपाय घोषित किए थे। ये उपाय अमेरिकी व्यापार अधिनियम, 1974 की धारा 301 के तहत लागू किए गए हैं। इन उपायों से भारतीय निर्यातकों को कुछ राहत मिली है।
वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि भारत के निर्यात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इस अतिरिक्त शुल्क के दायरे से बाहर रखा गया है। यूएसटीआर ने 60 अर्थव्यवस्थाओं की नीतियों और प्रथाओं की जांच की थी। इन अर्थव्यवस्थाओं में भारत भी शामिल था। जांच जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित थी। भारत ने जांच के दौरान यूएसटीआर के साथ विस्तृत लिखित प्रस्तुतियां दीं। व्यक्तिगत परामर्श के माध्यम से भी लगातार संपर्क बनाए रखा। सार्वजनिक सुनवाई में भी भारत ने अपनी बात रखी थी। इन निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत को कम टैरिफ श्रेणी में रखा गया है। इससे प्रमुख क्षेत्रों में भारतीय निर्यात को एक सापेक्ष लाभ मिलेगा।
संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि ने अमेरिकी व्यापार अधिनियम, 1974 की धारा 301 के तहत ये अंतिम उपाय लागू किए हैं। ये उपाय उन देशों की नीतियों और प्रथाओं की जांच के बाद आए हैं। इन पर जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और लागू करने से संबंधित आरोप थे। USTR ने भारत से आयात पर 10 फीसदी का अतिरिक्त शुल्क लगाया है। यह शुल्क पहले प्रस्तावित 12.5 फीसदी से कम है। भारत के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप यह कम दर हासिल हुई है। इस कम दर से प्रमुख क्षेत्रों में भारतीय निर्यात को एक सापेक्ष लाभ मिलेगा।


