– 10 वर्ष तक की जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान
– फास्ट ट्रैक न्यायालयों में होगी सुनवाई
– छात्रों के भविष्य की सुरक्षा पर सरकार का बड़ा फैसला
विशेष संवाददाता, यूथ इंडिया
नई दिल्ली। पेपर लीक को लेकर देशभर में उठे विवाद और छात्रों के आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पेपर लीक रोकथाम कानून के संशोधित विधेयक को मंजूरी दे दी गई। इस संशोधन के तहत पेपर लीक जैसे संगठित अपराध में शामिल दोषियों के लिए 10 वर्ष तक की कठोर कारावास और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। विधेयक को संसद के मौजूदा सत्र में पेश किए जाने की तैयारी है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता और करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब और कठोर कार्रवाई की जाएगी। संशोधित कानून में संगठित गिरोह, दलाल, परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़ और पेपर लीक नेटवर्क पर सख्त कानूनी शिकंजा कसने का प्रावधान किया गया है। कई मामलों को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक न्यायालय बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा था कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों को शीघ्र एवं कठोर दंड दिलाया जाएगा।
यह निर्णय ऐसे समय आया है जब छात्र संगठनों के साथ सरकार की बातचीत में प्रभावित परिवारों को मुआवजा और आंदोलन में शामिल छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने जैसे मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है। सरकार का कहना है कि केवल व्यक्तियों पर कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना उसका उद्देश्य है।


