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Thursday, July 23, 2026

राम मंदिर में दान चोरी के बाद बड़ा बदलाव: अब केवल एसबीआई के स्थायी कर्मचारी गिनेंगे चढ़ावे की नकदी

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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर में दान राशि की गिनती को लेकर बड़ा और अहम फैसला लिया है। हाल ही में सामने आए दान चोरी के मामले के बाद ट्रस्ट ने पूरी नकदी गणना व्यवस्था में व्यापक बदलाव करते हुए निजी एजेंसी के कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। अब मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली नकदी की गिनती का कार्य केवल भारतीय स्टेट बैंक के नियमित एवं स्थायी कर्मचारी ही करेंगे।
ट्रस्ट के इस फैसले का उद्देश्य दान राशि की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को और अधिक मजबूत बनाना है। नई व्यवस्था के तहत नकदी गिनने का पूरा कार्य SBI की प्रत्यक्ष निगरानी में होगा। बैंक के प्रशिक्षित कर्मचारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दान की गिनती करेंगे और उसके बाद राशि को बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से सुरक्षित जमा कराया जाएगा।
हाल के दिनों में राम मंदिर में दान गिनने के दौरान नकदी की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया था। जांच के दौरान कई कर्मचारियों की भूमिका संदेह के घेरे में आई, जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू की। इस घटना ने देशभर के श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया और मंदिर में दान प्रबंधन व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी उठे।

इसी पृष्ठभूमि में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एसबीआई के साथ विचार-विमर्श कर नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया, ताकि भविष्य में इस प्रकार की किसी भी अनियमितता की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
नई व्यवस्था के तहत दान राशि की गिनती दो शिफ्टों में कराई जाएगी। प्रत्येक चरण की निगरानी बैंक के अधिकृत अधिकारियों द्वारा की जाएगी। पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे हर लेन-देन का स्पष्ट विवरण उपलब्ध रहेगा और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की स्थिति में तत्काल जांच संभव होगी।
राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर नकद दान, आभूषण और अन्य भेंट अर्पित करते हैं। ऐसे में दान की प्रत्येक राशि का सुरक्षित और पारदर्शी प्रबंधन ट्रस्ट की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

ट्रस्ट का मानना है कि एसबीआई के नियमित कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपने से दान प्रबंधन व्यवस्था अधिक विश्वसनीय होगी और श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा। साथ ही भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

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