
शरद कटियार
नई दिल्ली में छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन के दौरान मीडिया की भूमिका एक बड़ी बहस के केंद्र में आ गई। प्रदर्शन स्थल पर कुछ युवाओं ने मीडिया कवरेज को लेकर मैं केवल आपत्ति और नाराज़गी जताई बल्कि आरोप लगाया कि उनकी आवाज़ और उनके मुद्दों को निष्पक्ष रूप से नहीं दिखाया जा रहा है। इतना ही नहीं जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कई प्रतिष्ठित मीडिया हाउस के पत्रकारों के कपड़े फाड़ डालें उनके कमरे छीन लिए चश्मा तोड़ दिए और सौ का नोट देकर भगा दिया,अंजना ओम जैसी जानी मानी पत्रकार तो इस आंदोलन मे चुप्पी ही साधे हैं। दिल्ली के जंतर मंतर की यह घटना केवल एक विरोध नहीं, बल्कि मीडिया और जनता के बीच बढ़ते अविश्वास का संकेत भी मानी जा रही है।
लोकतंत्र में मीडिया को आम भाषा मे चौथा स्तंभ कहा जाता है। जबकि वास्तव में मीडिया पहले स्तंभ है क्योंकि आजादी दिलाने वालों से लेकर सत्ता पर काबिज होने और संविधान लिखने वाले सभी देश के काबिल पत्रकार ही थे और आजादी की लड़ाई में पत्रकारों ने ही सर्वाधिक बढ़ चढ़कर भागीदारी रखी थी,मीडिया की सबसे बड़ी ताकत जनता का भरोसा होता है, ज़ो आज टूटता सा दिख रहा, देश मे निराशा का माहौल सा है ।आज जब प्रदर्शनकारी यह महसूस करने लगते हैं कि उनकी बात पूरी तरह सामने नहीं आ रही, तब असंतोष स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। दूसरी ओर, पत्रकारों का दायित्व भी आसान नहीं होता। उन्हें तनावपूर्ण परिस्थितियों में तथ्य जुटाने, विभिन्न पक्षों को सामने लाने और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने की चुनौती रहती है।
किसी भी मीडिया संस्थान की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन आलोचना और हिंसा के बीच स्पष्ट अंतर है। यदि किसी को कवरेज पर आपत्ति है तो उसका समाधान संवाद, सवाल और जवाबदेही के माध्यम से होना चाहिए, न कि टकराव या डराने-धमकाने से। इसी तरह मीडिया पर भी यह जिम्मेदारी है कि वह सत्ता और विपक्ष, दोनों से समान दूरी रखते हुए जनता के सरोकारों को प्राथमिकता दे।
आज का युवा केवल सुना जाना नहीं चाहता, बल्कि यह भी चाहता है कि उसकी बात बिना किसी पूर्वाग्रह के देश तक पहुँचे। यही कारण है कि मीडिया की विश्वसनीयता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब युवा अपनी बात निर्भीकता से रख सकेंगे, पत्रकार बिना दबाव के रिपोर्टिंग कर सकेंगे और असहमति का जवाब संवाद से दिया जाएगा। जनता का विश्वास, मीडिया की निष्पक्षता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,यही लोकतंत्र की वास्तविक पहचान हैं।


