‘संसद मार्च’ से पहले दिल्ली हाई अलर्ट पर, सुरक्षा एजेंसियों का अभेद घेरा; हजारों प्रदर्शनकारी डटे
क्रॉसर
देशभर से पहुंचे छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों के लोग, पुलिस ने संसद की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर की बहुस्तरीय बैरिकेडिंग
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रस्तावित ‘संसद मार्च’ से पहले राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर सोमवार को जनआंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र बन गया। सुबह से हो रही रुक-रुक कर बारिश भी प्रदर्शनकारियों के हौसले को डिगा नहीं सकी। हजारों की संख्या में छात्र, युवा, महिलाएं और विभिन्न राज्यों से आए सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि जंतर-मंतर पर जुटे और अपनी मांगों के समर्थन में लगातार नारेबाजी करते रहे।
राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू की। जंतर-मंतर, संसद मार्ग, विजय चौक, जनपथ और आसपास के पूरे वीआईपी क्षेत्र को सुरक्षा बलों ने चारों ओर से घेर लिया। बहुस्तरीय बैरिकेडिंग, दंगा नियंत्रण वाहन, पुलिस बसें और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान हर प्रमुख स्थान पर तैनात रहे। संसद की ओर बढ़ने वाले प्रत्येक मार्ग पर सघन निगरानी रखी गई।
सुरक्षा व्यवस्था के चलते राजधानी की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही। कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही सीमित कर दी गई, जबकि मेट्रो सेवाओं पर भी असर देखने को मिला। पटेल चौक, जनपथ, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, उद्योग भवन और अन्य संवेदनशील मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश एवं निकास द्वार एहतियातन बंद कर दिए गए। यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई।
प्रदर्शन स्थल पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने आंदोलन को और अधिक चर्चा में ला दिया। आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आज़ाद प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे और उनका समर्थन किया। फिल्म अभिनेता प्रकाश राज भी जंतर-मंतर पहुंचे और आंदोलन में शामिल लोगों से मुलाकात की।
बारिश के बीच भी प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा, बैनर और पोस्टर लिए डटे रहे। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात संसद तक पहुंचाना उनका संवैधानिक अधिकार है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि संसद क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाला इलाका है। बिना अनुमति किसी भी समूह को संसद की ओर मार्च करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। कानून-व्यवस्था भंग करने की कोशिश पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ राजधानी का राजनीतिक तापमान भी चरम पर पहुंच गया है। एक ओर विभिन्न संगठनों का आंदोलन है, तो दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियों के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती। लगातार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों का जंतर-मंतर पर डटे रहना इस आंदोलन की गंभीरता को दर्शाता है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और आंदोलनकारी संगठनों के बीच संवाद की कोई पहल होती है या टकराव की स्थिति और गहराती है।


