कमालगंज: कमालगंज क्षेत्र के किसानों के लिए इस बार मूंगफली ‘लाल सोना’ साबित हुई है। देर से हुई बारिश और रकबा घटने से मूंगफली की फसल ने किसानों को दोहरी खुशी दी है — पैदावार भी अच्छी हुई और बाजार भाव भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए।
कमालगंज के आसपास गगनी, खुदागंज, अखमेलपुर, श्रृंगीरामपुर, भिम्मी नगला, सबलपुर, कटरौली पट्टी, भूडनगरिया, गाँधीनगर,शेरपुर सराय समेत दर्जनों गांवों की बलुई-दोमट मिट्टी मूंगफली के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती है। यहां जलभराव कम होता है, जिससे दानों की क्वालिटी बेहतर आती है और फसल सड़ने का खतरा नहीं रहता।
इस बार क्या रहा खास?
खुदागंज निवासी किसान राजीव बताते हैं कि दलहनी फसल मूंगफली फरवरी में बोई जाती है और जून,जुलाई तक तैयार हो जाती है। इस साल मानसून देर से आया, जिसका फायदा मूंगफली को मिला। खरपतवार कम निकले और फसल की बढ़वार अच्छी रही। साथ ही, ज्यादातर किसानों ने इस बार मक्का की बुवाई ज्यादा की थी, जिससे मूंगफली का रकबा घट गया। मांग के मुकाबले आवक कम होने से दामों में उछाल आया।
स्थानीय मंडी में इन दिनों मूंगफली 8,500 से 10,000 रुपये प्रति कुंतल तक बिक रही है।गाँधीनगर के किसान गोविंद शाक्य कहते हैं, “पिछले साल 4500-55000 रु. प्रति क्विटंल के मिले थे, इस बार दाम सुनकर घर में खुशनुमा माहौल है।”
मक्का किसानों को लगा झटका
इसके उलट, मक्का किसानों को इस सीजन घाटा उठाना पड़ा। तेज गर्मी, कम बारिश और बार-बार आए आंधी-तूफान से मक्का की फसल झुलस गई और गिर गई।पैदावार औसतन 4 से 6 कुंतल प्रति बीघा ही रही, जबकि भाव भी 1,900 से 2,050 रुपये प्रति कुंतल के बीच सिमट गया। पानी की अधिक खपत वाली मक्का इस बार मौसम की मार नहीं झेल पाई।
कृषि विभाग के अधिकारियों का मानना है कि कमालगंज बेल्ट में मूंगफली का भविष्य उज्ज्वल है। अगर किसान उन्नत किस्म और सही समय पर बुवाई करें तो यह फसल मक्का का बेहतर विकल्प बन सकती है। साथ ही, दलहनी फसल होने से यह खेत की उर्वरा शक्ति भी बढ़ाती है।
फिलहाल आसपास की मंडियों में मूंगफली की छनाई-छिलाई का काम जोरों पर है और किसानों के चेहरों पर लौटी रौनक साफ देखी जा सकती है।
कमालगंज में मूंगफली की बंपर पैदावार से खिले किसानों के चेहरे, दाम 10 हजार तक पहुंचे


