नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच उभरी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के चुनावी राजनीति में आने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि संगठन ने अभी चुनाव लड़ने या राजनीतिक दल बनने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन नेतृत्व ने भविष्य के सभी विकल्प खुले होने के संकेत दिए हैं।
जंतर-मंतर पर आयोजित एक संवाद के दौरान सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके से जब चुनाव लड़ने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इसका जवाब अपने प्रवक्ताओं को देने के लिए कहा। प्रवक्ता विजेता दहिया ने कहा कि राजनीति लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन फिलहाल संगठन खुद को एक जनआंदोलन के रूप में देखता है। उनका कहना था कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि जनता को अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से लगातार जवाब मांगना चाहिए।
प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि देश में पहले से सैकड़ों राजनीतिक दल मौजूद हैं, फिर भी लोग निराश हैं। उन्होंने कहा कि सीजेपी अभी एक आंदोलन है और चुनाव लड़ने को लेकर बार-बार पूछे जाने वाले सवालों पर ऐसा लगता है कि एक दिन मीडिया ही उसे राजनीतिक दल घोषित कर देगा।
वहीं प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि संगठन का उद्देश्य फिलहाल जनहित के मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय कराना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनआंदोलन, सिविल सोसाइटी और प्रेशर ग्रुप की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भविष्य में संगठन किस दिशा में आगे बढ़ेगा, यह समय और परिस्थितियों के अनुसार तय किया जाएगा।
सीजेपी की ओर से फिलहाल यह स्पष्ट किया गया है कि उसका मुख्य उद्देश्य युवाओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर जनआंदोलन को मजबूत करना है। चुनावी राजनीति में उतरने को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।


