– झारखंड हाईकोर्ट को 6 महीने में अपीलों पर फैसला करने का निर्देश
नई दिल्ली। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला मामलों में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी जमानत रद्द करने की मांग को खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि करीब छह वर्षों से मिली स्वतंत्रता के बाद इस स्तर पर उनकी जमानत में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी माना कि लालू प्रसाद यादव लंबे समय से जमानत पर हैं और ऐसे में केवल जमानत रद्द करने के आधार पर उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता छीनना न्यायसंगत नहीं होगा। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि मामले का अंतिम फैसला अभी बाकी है और न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह जारी रहेगी।
सर्वोच्च न्यायालय ने झारखंड हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि लालू प्रसाद यादव की सजा निलंबन से जुड़ी लंबित आपराधिक अपीलों की सुनवाई में अनावश्यक देरी न हो। अदालत ने कहा कि इन अपीलों का यथासंभव छह महीने के भीतर निस्तारण किया जाए, ताकि वर्षों से लंबित इस बहुचर्चित मामले को अंतिम मुकाम तक पहुंचाया जा सके।
चारा घोटाला देश के सबसे चर्चित आर्थिक अपराध मामलों में गिना जाता है। सरकारी खजाने से पशुपालन विभाग के माध्यम से करोड़ों रुपये के अवैध निकासी के आरोपों में कई मामले दर्ज हुए थे, जिनमें लालू प्रसाद यादव को अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। स्वास्थ्य कारणों और अन्य कानूनी आधारों पर उन्हें पहले झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिली थी।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से फिलहाल लालू प्रसाद यादव को राहत बरकरार रहेगी, लेकिन कानूनी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। अब झारखंड हाईकोर्ट में लंबित अपीलों की सुनवाई और उस पर आने वाला फैसला इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।
राजनीतिक दृष्टि से भी इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिहार की राजनीति में सक्रिय लालू प्रसाद यादव के लिए यह फैसला राहत लेकर आया है, वहीं विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों की नजर अब हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है।


