नई दिल्ली। नोएडा भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को भंग कर दिया है। अदालत ने इस मामले की आगे की जांच उत्तर प्रदेश विजिलेंस ब्यूरो को सौंपने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कुछ भूस्वामियों को कथित रूप से नियमों के विपरीत अधिक मुआवजा दिए जाने तथा अधिकारियों की मिलीभगत के आरोपों पर विचार किया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंप दी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर अब तक छह एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। सरकार ने अदालत से अनुरोध किया कि आगे की जांच विजिलेंस ब्यूरो को सौंपी जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की दलील स्वीकार करते हुए एसआईटी को आगे की जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया और आदेश दिया कि अब सभी दर्ज मामलों की जांच उत्तर प्रदेश विजिलेंस ब्यूरो करेगा। अदालत के आदेश के साथ ही विजिलेंस ने तत्काल प्रभाव से जांच की जिम्मेदारी संभालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
नोएडा भूमि अधिग्रहण मुआवजा प्रकरण में आरोप है कि कुछ मामलों में नियमों का उल्लंघन कर भूस्वामियों को अधिक मुआवजा दिया गया और इसमें संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत रही। अब विजिलेंस ब्यूरो पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर यह पता लगाएगा कि कथित अनियमितताओं में किन-किन लोगों की भूमिका रही और सरकारी खजाने को कितना नुकसान पहुंचा।


