– अब अदालत के फैसले का इंतजार
नई दिल्ली। देश के तीन सबसे चर्चित धार्मिक विवादों—वाराणसी का ज्ञानवापी परिसर, मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद और संभल का मंदिर-मस्जिद प्रकरण—में आपसी सहमति से समाधान निकालने की संभावना फिलहाल समाप्त होती नजर आ रही है। जानकारी के अनुसार, हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता (मेडिएशन) की पहल को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया है कि वे इन मामलों का अंतिम समाधान केवल न्यायालय के फैसले के माध्यम से ही चाहते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने इन संवेदनशील मामलों में लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया के बीच सौहार्दपूर्ण समाधान की संभावना तलाशने के उद्देश्य से मध्यस्थता का सुझाव दिया था। अदालत की मंशा थी कि यदि दोनों पक्ष सहमत हों तो बातचीत और आपसी सहमति के माध्यम से विवाद का समाधान निकाला जा सके। हालांकि, दोनों पक्षों ने अपने-अपने कानूनी और धार्मिक पक्षों का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं जताई।
बताया जा रहा है कि हिंदू पक्ष का कहना है कि मामला धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक तथ्यों से जुड़ा है, इसलिए इसका अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही होना चाहिए। वहीं मुस्लिम पक्ष ने भी न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा कि विवाद का समाधान कानून और संविधान के दायरे में अदालत के निर्णय से ही होना चाहिए।
मध्यस्थता प्रस्ताव खारिज होने के बाद अब तीनों मामलों की नियमित न्यायिक सुनवाई पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी। अदालत दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों, ऐतिहासिक साक्ष्यों, पुरातात्विक रिपोर्टों और कानूनी दलीलों के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ाएगी।
ज्ञानवापी, श्रीकृष्ण जन्मभूमि और संभल से जुड़े मामले पिछले कई वर्षों से विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं। इन मामलों को लेकर समय-समय पर अनेक याचिकाएं, सर्वेक्षण, ऐतिहासिक दस्तावेज और कानूनी बहसें सामने आती रही हैं। यही कारण है कि इन पर देशभर की निगाहें टिकी रहती हैं और हर न्यायिक प्रक्रिया को विशेष महत्व दिया जाता है।


