लखनऊ। देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक राष्ट्र, एक चुनाव) की व्यवस्था लागू करने की दिशा में गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) अब उत्तर प्रदेश में व्यापक विचार-विमर्श करेगी। गोवा में दो दिवसीय परामर्श पूरा करने के बाद समिति दो दिन के दौरे पर लखनऊ पहुंचेगी, जहां राज्य सरकार, विधानसभा, राजनीतिक दलों, संवैधानिक विशेषज्ञों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाएंगे।
भाजपा सांसद पी.पी. चौधरी की अध्यक्षता वाली इस संयुक्त संसदीय समिति में 39 सांसद शामिल हैं। समिति संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 तथा केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की समीक्षा कर रही है। इन विधेयकों का उद्देश्य देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की संभावनाओं, संवैधानिक प्रावधानों और आवश्यक कानूनी बदलावों का परीक्षण करना है।
लखनऊ में प्रस्तावित बैठकों के दौरान समिति उत्तर प्रदेश सरकार, विधानसभा अध्यक्ष, विभिन्न राजनीतिक दलों, विधायकों, राज्य निर्वाचन आयोग, संवैधानिक एवं विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, नागरिक संगठनों और मीडिया प्रतिनिधियों से विस्तार से चर्चा करेगी। इस दौरान एक साथ चुनाव कराने से जुड़े संवैधानिक, प्रशासनिक, वित्तीय और व्यावहारिक पहलुओं पर व्यापक मंथन होगा।
समिति यह भी समझने का प्रयास करेगी कि यदि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराए जाते हैं तो चुनावी प्रक्रिया, प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन, मतदाता सुविधा और शासन व्यवस्था पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। विभिन्न पक्षों से प्राप्त सुझावों और आपत्तियों को समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट में शामिल करेगी, जिसे बाद में केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा।
गौरतलब है कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। समर्थकों का मानना है कि इससे चुनावी खर्च कम होगा, प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और बार-बार लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता से विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे। वहीं, विपक्ष के कई दलों और कुछ संवैधानिक विशेषज्ञों ने इसके संघीय ढांचे, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए हैं।
लखनऊ में होने वाला यह दो दिवसीय मंथन समिति की अंतिम रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।


