– पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष का खतरा
नई दिल्ली/तेहरान। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तेज हो गया है। हालिया घटनाक्रम में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि पिछले तीन दिनों के दौरान ईरानी सैन्य ढांचे को कमजोर करने के उद्देश्य से 300 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है कि उसने कतर स्थित अमेरिकी अल उदीद एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सीधा असर डाल सकता है।
अमेरिकी पक्ष का कहना है कि उसके सैन्य अभियान ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों और क्षेत्रीय अमेरिकी हितों पर किए गए हमलों के जवाब में चलाए जा रहे हैं। वहीं ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर आक्रामक कार्रवाई का आरोप लगाते हुए जवाबी हमले तेज करने की चेतावनी दी है। दोनों देशों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि सभी मामलों में संभव नहीं हो सकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो इसका प्रभाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी जोखिम के दायरे में आ सकते हैं। इसके साथ ही वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता, शिपिंग लागत में वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की अपील कर रहा है। हालांकि मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि यदि दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई जारी रखते हैं, तो पश्चिम एशिया में संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।


