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Friday, July 10, 2026

नफरत भी उसी से होती है, जो दिखाई देता है

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भरत चतुर्वेदी
“नफरत कमाना भी आसान नहीं, इस दुनिया में लोगों की आँखों में खटकने के लिए भी कुछ खूबियाँ होनी चाहिए।” यह पंक्ति जीवन की एक गहरी सच्चाई को सामने रखती है। अक्सर हम मानते हैं कि यदि कोई हमारी आलोचना कर रहा है या हमसे ईर्ष्या करता है, तो शायद हमसे कोई गलती हुई है। लेकिन हर आलोचना गलती का परिणाम नहीं होती; कई बार वह आपकी सफलता, व्यक्तित्व, प्रभाव और बढ़ती पहचान का भी परिणाम होती है।
समाज में वही व्यक्ति सबसे अधिक चर्चा में रहता है, जो कुछ अलग करता है। जो भीड़ से अलग सोचता है, नई राह बनाता है और अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ता है, वह प्रशंसा भी पाता है और विरोध भी। इतिहास गवाह है कि जिन लोगों ने समाज को नई दिशा दी, उन्हें सबसे पहले विरोध, उपहास और नफरत का सामना करना पड़ा।
दरअसल, नफरत का जन्म अक्सर तुलना से होता है। जब किसी की उपलब्धियाँ दूसरों को अपनी कमियों का एहसास कराती हैं, तब कुछ लोग प्रेरित होने के बजाय ईर्ष्या का रास्ता चुन लेते हैं। ऐसे लोग आपकी मेहनत नहीं देखते, केवल आपकी सफलता देखते हैं। उन्हें आपकी रातों की जागी हुई मेहनत नहीं दिखती, सिर्फ आपकी चमक दिखाई देती है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हर विरोध सही है या हर आलोचक गलत। रचनात्मक आलोचना हमें बेहतर बनाती है, जबकि ईर्ष्या से पैदा हुई नफरत केवल आलोचक की मानसिकता को उजागर करती है। इसलिए बुद्धिमानी इसी में है कि हम आलोचना से सीखें, लेकिन नफरत को अपनी मंजिल का रास्ता न बनने दें।
जो व्यक्ति अपने सिद्धांतों, ईमानदारी और मेहनत पर अडिग रहता है, वह समय के साथ सम्मान भी अर्जित करता है। लोगों की राय बदल सकती है, लेकिन चरित्र और कर्म की पहचान स्थायी होती है। इसलिए यदि कुछ लोग आपकी प्रगति से असहज हैं, तो उससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह भी संभव है कि आपकी सफलता उनकी सीमाओं से बड़ी हो गई हो।
जीवन का उद्देश्य सबको खुश करना नहीं, बल्कि अपने कर्तव्य और मूल्यों के प्रति ईमानदार रहना है। यदि आपके अच्छे कार्यों से समाज का भला हो रहा है, तो कुछ लोगों की नाराज़गी आपकी दिशा तय नहीं कर सकती।
अंततः, नफरत से बड़ा उत्तर सफलता है, और आलोचना से बड़ा जवाब आपका चरित्र। इसलिए अपनी ऊर्जा दूसरों की नफरत पर नहीं, बल्कि अपने लक्ष्य, अपने कर्म और अपने व्यक्तित्व को बेहतर बनाने में लगाइए। क्योंकि इतिहास उन्हीं को याद रखता है जिन्होंने विरोध के बीच भी अपने रास्ते पर चलना नहीं छोड़ा।

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