– तेल बाजार में बढ़ी हलचल
तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमला करते हुए कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन दागे। दोनों देशों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए और कई प्रोजेक्टाइल को बीच रास्ते में ही नष्ट कर दिया गया। इस घटनाक्रम के साथ ही करीब दो सप्ताह पहले लागू हुआ 60 दिन का संघर्ष विराम गंभीर संकट में पड़ गया है।
अमेरिका ने आरोप लगाया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद उसने ईरानी सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की। जवाब में ईरान ने कहा कि अमेरिकी हमले संघर्ष विराम और आपसी समझ के उल्लंघन हैं तथा इसी के प्रतिकार में यह सैन्य कार्रवाई की गई। दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
ताजा घटनाक्रम के बीच अमेरिका ने ईरान को दी गई वह छूट भी वापस ले ली है, जिसके तहत वह सीमित दायरे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेच पा रहा था। इस फैसले के बाद ईरान के तेल निर्यात पर फिर से कड़े प्रतिबंध लागू हो गए हैं, जिससे उसकी तेल बिक्री और विदेशी मुद्रा आय पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि “अब डॉलर में तेल नहीं बेच पाएगा” जैसी बात स्थिति का सरलीकृत वर्णन है; वास्तविक कदम ईरानी तेल निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंधों और बिक्री की अनुमति वापस लेने से जुड़ा है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है, क्योंकि निवेशकों को आशंका है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ा तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने पर विश्व अर्थव्यवस्था, महंगाई और ऊर्जा सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।


