– चर्चित मुकदमो की सुनवाई में अभियोजन के सामने बढ़ी चुनौती
– राजनैतिक दवाब या जिम्मेदारों का भय, थमी कार्यवाही
– माफिया के खुलेआम बाहर घूम रहे दवंग गुर्गे
– जिम्मेदार तंत्र के खिलाफ पड़ रहीं रिट याचिकाएं
फर्रुखाबाद। यूपी के टॉप टेन माफिया और करीब 65 मुक़दमों मे फ़से अनुपम दुबे के मामलों मे धीरे धीरे गवाह मुकरने लगे हैं शनिवार को एक मुक़दमे का भय जदा गवाह और मुकर गया हालांकि गैंगस्टर अधिनियम से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान गवाह अधिवक्ता राजीव वाजपेयी नें अपनी गवाही खुलकर दी। लेकिन बैकफुट पर आये प्रशासन के बाद अभियोजन पक्ष के सामने मुकदमे को प्रभावी ढंग से साबित करने की चुनौती और बढ़ गई है।माफिया गैंग के बाहर खुलेआम घूम रहे दवंगों के भय और माफिया तंत्र पर कार्यवाही करने वाले जावांज पुलिस कर्मी आज खुद अपनी जांचो मे लम्बे समय से कैसे हैं उनकी हालत देख अन्य पुलिसकर्मी भी हाथ डालने से बच रहे हैं जिससे सरकार का जहां भाई खत्म हो चुका है वही मुकदमा लिखने वाले वादी और गवाह भी हट बच कर रहना चाह रहे हैं।
शनिवार को सुनवाई के दौरान न्यायालय में पेश हुए कृष्ण गोपाल तिवारी, निवासी नगला बाग रठौरी, ने अभियोजन के अनुसार अपने पूर्व कथनों का समर्थन नहीं किया। पता चला है इसके बाद अभियोजन पक्ष ने न्यायालय की प्रक्रिया के अनुरूप उन्हें प्रतिकूल (होस्टाइल) गवाह घोषित किए जाने की कार्यवाही आगे बढ़ाई।
अभियोजन की ओर से अधिवक्ता राजीव वाजपेयी ने न्यायालय में पक्ष रखते हुए उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य गवाहों के आधार पर मुकदमे को आगे बढ़ाने की दलील दी। अभियोजन का कहना है कि किसी एक या कुछ गवाहों के मुकर जाने से मुकदमे का स्वतः अंत नहीं हो जाता, क्योंकि न्यायालय दस्तावेजी साक्ष्यों, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और अन्य गवाहों के आधार पर भी निर्णय करता है।
मामले की अगली सुनवाई न्यायालय द्वारा निर्धारित तिथि पर होगी। न्यायालय उपलब्ध सभी साक्ष्यों, गवाहों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद कानून के अनुसार निर्णय देगा।
उल्लेखनीय है कि चर्चित मामलों में गवाहों के बयान बदलने की घटनाएं अभियोजन की रणनीति और मुकदमे की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन अंतिम निर्णय केवल न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों और विधिक परीक्षण के आधार पर ही होता है। यदि मामले में कोई नया आधिकारिक तथ्य, न्यायालय का आदेश या जांच रिपोर्ट सामने आती है, तो उससे मुकदमे की दिशा प्रभावित हो सकती है।
बताना जरूरी है कि माफिया तंत्र इन दोनों जनपद में खासा प्रभावी है, लंबे समय से माफिया या उसके गैंग के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने के कारण जहां हौसले बड़े हैं वहीं माफिया तंत्र पर मुकदमा दर्ज करने वाले वादी और गवाहों में भी मायूसी आई है साथ ही वह पुलिस कर्मी भी पस्त पड़ गए हैं जिन्होंने पूरी दमदारी के साथ माफिया तंत्र से लोहा लेकर कई को सलाखों के पीछे भेजो आज वह झूठी शिकायतों मैं अपनी ही जांच करने में उलझे हैं जबकि आलाधिकारी व कई पुलिसकर्मी उच्च न्यायालय में माफिया तंत्र के सहयोगियों द्वारा आए दिन डाली जा रही रिट याचिकाओं का सामना करने को मजबूर हैं।


