एसआईटी को जांच के लिए 15 दिन और मिले
अयोध्या। देशभर में चर्चा का विषय बने राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। मामले में गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ला के अयोध्या स्थित योग केंद्र पर पुलिस की छापेमारी के दौरान एक संदूक बरामद हुआ है, जिस पर लाल रंग से ‘रामराज्य कोष’ लिखा था और उस पर डिजिटल भुगतान के लिए पेटीएम का क्यूआर कोड भी लगा मिला। 28 जून को हुई इस कार्रवाई का वीडियो बुधवार को सामने आने के बाद मामले ने नया तूल पकड़ लिया है। इस बीच प्रदेश सरकार ने जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दे दिया है।
एसआईटी ने फैजाबाद मंडल कारागार में बंद सभी आठ आरोपियों से पूछताछ की, जिसमें सबसे लंबी पूछताछ मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से करीब दो घंटे तक चली। पूछताछ में 5 जून को बरामद लगभग 20 लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के आभूषण, दान राशि और कथित वित्तीय लेनदेन को लेकर विस्तार से सवाल-जवाब किए गए। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि चोरी का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
जांच का दायरा अब राम मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था तक भी पहुंच गया है। मंदिर में तैनात लगभग 400 निजी सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी, रोस्टर, सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश और निकास रजिस्टर की गहन जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा जिस निजी सुरक्षा एजेंसी के पास था, उस पर ट्रस्ट हर महीने करीब एक करोड़ रुपये खर्च करता था। सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत की भी जांच की जा रही है।
मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला मूल रूप से प्रतापगढ़ जिले के महेशगंज थाना क्षेत्र के बाबूपुर नरियावां गांव का निवासी है। उसके पिता राम सजीवन शुक्ला किसान हैं। बताया जा रहा है कि अविनाश पिछले करीब डेढ़ वर्ष से अयोध्या में रहकर राम मंदिर परिसर में कार्यरत था और उसे लगभग 21,500 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। गांव के लोगों का कहना है कि उसका परिवार सामान्य आर्थिक स्थिति वाला है और हाल ही में उसने अपने भाई के साथ नया मकान बनवाया था।
इस बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह केवल चढ़ावे की चोरी का मामला नहीं, बल्कि “राम मंदिर में हजारों करोड़ रुपये के घोटाले” की जांच होनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। हालांकि, मंदिर ट्रस्ट और जांच एजेंसियों ने मामले की निष्पक्ष जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर न पहुंचने की अपील की है।
अब पूरे प्रदेश की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि 15 जुलाई तक सरकार को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट में चोरी की पूरी साजिश, संभावित दोषियों और सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक से जुड़े महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।


