33.8 C
Lucknow
Tuesday, June 30, 2026

चीन से हर साल 1100 से अधिक सैन्य वार्ताएं, भविष्य के तकनीकी युद्ध के लिए तैयार हो रही भारतीय सेना : जनरल उपेंद्र द्विवेदी

Must read

 

नई दिल्ली। निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारत-चीन सीमा की स्थिति, भारतीय सेना की नई रणनीति, अग्निपथ योजना और भविष्य के युद्धों को लेकर कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वी लद्दाख में तनाव के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थिति पहले की तुलना में स्थिर हुई है, लेकिन भारतीय सेना पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने बताया कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच सीमा पर विवाद और गलतफहमियों को रोकने के लिए हर वर्ष 1100 से अधिक जमीनी स्तर की सैन्य वार्ताएं होती हैं।सेना प्रमुख ने कहा कि सीमा पर हॉटलाइन, फ्लैग बैठकों और कमांडर स्तर की नियमित वार्ताओं के माध्यम से स्थानीय मुद्दों का समाधान किया जाता है। उनके अनुसार वर्ष 2024-25 के दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर सकारात्मक प्रगति हुई है। कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, सीमा व्यापार को दोबारा शुरू करने पर सहमति और निरंतर संवाद से संबंध सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़े हैं, हालांकि वास्तविक नियंत्रण रेखा अब भी संवेदनशील बनी हुई है।जनरल द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सेना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताते हुए कहा कि इस अभियान ने साबित कर दिया कि भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं, बल्कि ड्रोन, साइबर क्षमता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सुरक्षित संचार प्रणाली और बहु-आयामी युद्ध प्रणाली के माध्यम से लड़े जाएंगे। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और अत्याधुनिक तकनीक के उपयोग ने भारतीय सेना की नई युद्ध क्षमता को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है।उन्होंने बताया कि सेना का तेजी से आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इसके तहत नई सैन्य इकाइयों का गठन किया जा रहा है, जिनमें रुद्र ब्रिगेड, भैरव बटालियन, अशनि ड्रोन प्लाटून, शक्तिबाण रेजिमेंट, दिव्यास्त्र बैटरी और बाज बटालियन शामिल हैं। इनका उद्देश्य निगरानी क्षमता बढ़ाना, ड्रोन संचालन को मजबूत करना, खुफिया सूचनाएं जुटाना तथा वास्तविक समय में युद्धक्षेत्र की जानकारी प्राप्त करना है।
अग्निपथ योजना पर सेना प्रमुख ने कहा कि इस योजना के शुरुआती परिणाम उत्साहजनक हैं। अग्निवीर तेजी से सैन्य जीवन में ढल रहे हैं और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर सेना की परिचालन क्षमता को मजबूत बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि योजना का निरंतर मूल्यांकन किया जा रहा है और भविष्य में किसी भी प्रकार का निर्णय सेना की परिचालन आवश्यकताओं तथा जमीनी अनुभव के आधार पर लिया जाएगा।जनरल द्विवेदी ने आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्य आवश्यकता बताते हुए कहा कि युद्ध या किसी संकट की स्थिति में भारत को हथियारों, गोला-बारूद और सैन्य तकनीक के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना स्वदेशी तकनीकों, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों और आधुनिक संचार नेटवर्क को तेजी से अपना रही है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, निजी उद्योग, नवाचार आधारित कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से सेना भविष्य की हर चुनौती का सामना करने के लिए स्वयं को लगातार सशक्त बना रही है।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article