फर्रुखाबाद।राष्ट्रीय प्रगतिशील फोरम कायमगंज द्वारा कबीर जयंती पर कृष्णा प्रेस परिसर सड़वाड़ा कायमगंज में आयोजित संगोष्ठी में साहित्यकार प्रोफेसर रामबाबू मिश्र रत्नेश ने कहा कि शब्द के अक्खड जुलाहे संत कवि कबीर दास ने पाखंड और कुत्सित परंपराओं को लेकर जाति धर्म और समाज के ठेकेदारों को खरी खरी सुनाई।
उन्होंने कहा कि स्वामी रामानंद के यशस्वी शिष्य कबीर दास को अपढ़ सिद्ध करना बेमानी है। उनकी उलट वांसियों को सुलझाने में बड़े-बड़े विद्वानों के दिमाग आज भी चक्करधिन्नी काटते हैं।
प्रधानाचार्य योगेश तिवारी ने कहा की हिंसा, उन्माद और नफरत के इस दौर में मानवता का अस्तित्व बरकरार रखने के लिए एक अदद स्पष्टवादी कर्मयोगी संत कबीर की जरूरत है। गीतकार पवन बाथम कहा कि कबीर के साखी और सबद हिंदी साहित्य की अमूल्य निधि हैं। फकीरों से लेकर विश्व स्तर के गायक कलाकार आज भी उनके पदों को गाते हैं। प्रधानाचार्य शिवकांत शुक्ला एवं अमरनाथ शुक्ला ने कहा कि कबीर की वाणी मानव की चेतना को झकझोर कर जगाती हैं। ऐसे संत और कहीं दुर्लभ हैं। वीएस तिवारी ने कहा कि तुलसी सूर कबीर मानवीय संवेदनाओं के अमर गायक है। उनकी सधुक्कड़ी बोली सीधी हृदय में प्रवेश करती है। युवा कवि अनुपम मिश्रा ने कहा कि निर्गुण ज्ञानवादी कबीर प्रेम को मानव जीवन का केंद्रीय भाव मानते हैं।
डॉ सुनीत सिद्धार्थ ने संत कबीर और संत रविदास को भारत की आत्मा का प्रकाश बताया। छात्र कवि यशवर्धन ने काव्य पाठ करते हुए कहा-
होंगे लेखक समीक्षक कवि कोविद मतिधीर
नहीं किसी साहित्य में तुलसी सूर कबीर।
गोष्ठी में शिव कुमार दुबे ,हंसा मिश्रा , शिक्षिका रेखा तिवारी आदि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व प्रधानाचार्य अहिवरन सिंह गौर ने की उन्होंने कहा कि संत राष्ट्र धर्म और संस्कृति के समर्थ प्रहरी होते हैं।
अंत में फतेहगढ़ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट जवाहर सिंह गंगवार ने कबीर को विश्व के सारे धर्म के लिए आदर्श संत बताया।
वे मानव चेतना को जगा कर विश्व धर्मों की पैरोकारी करते थे।
क्रांतिकारी संत कवि कबीर दास जयंती पर गोष्ठी , बताया विश्व धर्म का पैरोकार


