एडीओ पंचायत को मिल सकती है प्रशासक की जिम्मेदारी
फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक संचालन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद नई स्थिति बन गई है। पूर्व ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने पर न्यायालय की रोक के बाद अब शासन के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यदि हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप शासन कोई नया आदेश जारी करता है, तो ग्राम पंचायतों का प्रशासनिक दायित्व एक बार फिर सहायक विकास अधिकारी (एडीओ) पंचायत को सौंपा जा सकता है। इस संभावना ने पूर्व ग्राम प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों की चिंता बढ़ा दी है।
फर्रुखाबाद जिले में कुल 580 ग्राम पंचायतें हैं। पिछले महीने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद शासन ने अग्रिम आदेश तक पूर्व प्रधानों को प्रशासक नियुक्त कर दिया था। हालांकि उन्हें केवल दैनिक प्रशासनिक कार्य करने की अनुमति थी और किसी भी प्रकार के नीतिगत अथवा वित्तीय महत्व के निर्णय लेने पर रोक लगाई गई थी। इस बीच हाईकोर्ट के आदेश ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।
न्यायालय की टिप्पणी के बाद पूर्व प्रधानों में असमंजस की स्थिति है। पंचायत चुनाव नजदीक होने के कारण कई प्रधान प्रशासक के रूप में अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय होकर राजनीतिक और सामाजिक समीकरण मजबूत करने में जुटे थे। अब उन्हें आशंका है कि यदि शासन एडीओ पंचायत को प्रशासक नियुक्त करता है तो पंचायतों का पूरा प्रशासनिक नियंत्रण अधिकारियों के हाथ में चला जाएगा और उनकी भूमिका समाप्त हो जाएगी।
ग्राम प्रधानों का कहना है कि शासन हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ उच्च स्तर पर कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकता है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार इस मामले में अपना पक्ष मजबूती से रखेगी, जिससे पंचायतों के संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके। फिलहाल पूरे प्रदेश के प्रधानों की निगाहें शासन के अगले निर्णय पर टिकी हैं।
जिला पंचायत राज अधिकारी कपिल कुमार ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन स्तर से जो भी निर्देश प्राप्त होंगे, उनका पूरी तरह पालन कराया जाएगा। ऐसे में अब पंचायत प्रशासन की अगली व्यवस्था शासन के आदेश के बाद ही तय होगी। वर्तमान परिस्थितियों में ग्राम पंचायतों के संचालन और आगामी पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।


