मोहम्मदाबाद (फर्रुखाबाद)। कस्बा मोहम्मदाबाद एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में मोहर्रम की 9वीं एवं 10वीं तारीख पर धार्मिक आस्था, अनुशासन और भाईचारे के साथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में आयोजित मजलिसों में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर उनकी कुर्बानी को याद किया तथा सत्य, न्याय और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
मोहर्रम की 9वीं तारीख को कस्बे के विभिन्न स्थानों पर इमाम हुसैन के रौज़े का प्रतीक स्वरूप सजावट की गई। उलेमाओं ने अपने संबोधन में कर्बला की घटना पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि इमाम हुसैन की शहादत अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और इंसानियत की रक्षा का संदेश देती है। अकीदतमंदों ने मातम कर शहीद-ए-कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। रात्रि में पारंपरिक रूप से ताजियों का भ्रमण भी कराया गया।
10वीं मोहर्रम (यौमे आशूरा) पर सुबह लगभग 11:45 बजे पारंपरिक अलम और ताजिया जुलूस निर्धारित मार्गों से निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। पूरे मार्ग पर अनुशासन और शांति व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया। जगह-जगह सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय लोगों द्वारा शर्बत, पेयजल और खाद्य सामग्री की व्यवस्था की गई। जुलूस के समापन पर क्षेत्र में अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी गई।
मोहर्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने लगातार भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों ने बताया कि सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए।
मोहर्रम के अवसर पर विभिन्न समुदायों के लोगों ने भी सहयोग कर गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक एकता की मिसाल पेश की। शाम लगभग 7 बजे संकिसा रोड स्थित कर्बला में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा, जिसके साथ मोहर्रम के आयोजनों का समापन होगा।


