फर्रुखाबाद । मोहर्रम के महीने में विगत लगभग डेढ़ सौ सालो से भीगमपुरा स्थित भोले मियां के इमाम बारे में पुश्तैनी आलम रखे जाते हैं इस वर्ष भी इमाम बारे में मोहर्रम की एक तारीख से आलम रखे गए।
बता दें कि मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे इमाम हुसैन की शहादत 10 मुहर्रम 61 हिजरी को कर्बला में हुई थी ।अग्रेजी तारीख 10 अक्टूबर 680 ईस्वी बनती है। 25 जून 2026 है तो इमाम हुसैन की शहादत को 1345 साल 8 महीने और 14 दिन हो चुके हैं।
हिजरी साल के हिसाब से देखें तो 61 हिजरी से 1448 वी हिजरी चल रहा है, यानी 1386 हिजरी वर्ष हो गए
इमाम हुसैन के चाहने वाले उनकी याद में ताजियादारी और अलम इमाम वाडो में रखते हैं व लंगर करते हैं। मुहल्ला महमूद खा भीकमपुरा में भोले मियां के घर पर इमाम बाड़े में मुहर्रम की पहली तारीख को अलम रखे गए थे । मुहर्रम की 8 तारीख को बड़ा बंगशपुरा से कई अलम को उठाया गया और शहर में जगह-जगह इमामबाड़ो पर अलम को एक दूसरे के अलम से मिलाया गया भोले मियां ने रखें गए ।अलम को लेकर बंगशपूरे के अलम से मिलाया जितने भी अलम को लेकर लोग आए उन सभी को भोले मियां ने ठंडा शरबत पिलवाया।
भोले ने बताया उनके घर इमाम बाड़े पर चार पीढ़ी से अलम को रखा जाता है ।लगभग डेढ़ सौ वर्ष अलम को रखते हो गए हैं। उन्होंने बताया कि यह परंपरा उनके यहां पुश्तैनी चली आ रही है । उनके बाद उनके बच्चे अलम रखेंगे, आमीन।
विगत डेढ़ सौ सालो से भोले मियां के इमाम बाड़े में रखे जाते हैं अलम


