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Tuesday, June 23, 2026

चढ़ावा गबन मामला: जांच के बाद खुला बड़ा खेल सवा साल में 200 से 1400 करोड़ तक गबन का अनुमान

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व्यवस्था बदली—अब जेब रहित कपड़े और सख्त निगरानी लागू

लखनऊ

अयोध्या राम मंदिर में दान राशि में कथित गबन और बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के खुलासे के बाद प्रशासन और ट्रस्ट ने सुरक्षा तथा दान गणना व्यवस्था में कड़े बदलाव लागू कर दिए हैं। जांच रिपोर्टों में करोड़ों के गबन के संकेत मिलने के बाद पूरी प्रणाली को अधिक पारदर्शी और निगरानी आधारित बनाया जा रहा है।

अयोध्या में दान गणना व्यवस्था को सख्त करते हुए अब गणना कक्ष में प्रवेश करने वाले सभी कर्मियों के लिए बिना जेब वाले विशेष वस्त्र पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही मोबाइल फोन, पर्स, बैग और अन्य निजी सामान पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिए गए हैं। प्रवेश और निकासी दोनों स्तरों पर सघन जांच की जा रही है।

दान प्रक्रिया की निगरानी को मजबूत करते हुए कैमरों की संख्या 6 से बढ़ाकर 10 कर दी गई है। पूरी गणना प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग की जा रही है और प्रत्येक कर्मचारी की उपस्थिति व गतिविधियों का विस्तृत रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा रहा है, ताकि किसी भी स्तर पर अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई हो सके।

यह सख्ती उस समय लागू की गई है जब विशेष जांच दल की प्रारंभिक रिपोर्ट में दान राशि में बड़े पैमाने पर गबन और हेरफेर के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह अनियमितता करीब सवा वर्ष से चलती आ रही थी, जिसमें महाकुंभ और माघ मेले के दौरान दान में आई भारी वृद्धि का फायदा उठाया गया।

सूत्रों के अनुसार इस अवधि में प्रतिदिन लगभग 10 से 15 लाख रुपये तक की राशि के हेरफेर के संकेत मिले हैं। वहीं कुल गबन का अनुमान लगभग 200 करोड़ रुपये से लेकर 1400 करोड़ रुपये तक बताया जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे प्रकरण में लगभग 25 से 30 लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इनमें ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारी, कर्मचारी और उनके रिश्तेदारों के नाम शामिल हैं। अनिल मिश्रा पर लगभग 40 प्रतिशत कमीशन लेने के आरोपों का भी उल्लेख जांच रिपोर्ट में किया गया है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि दान गणना प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। दानपात्रों से निकली नकदी को एक साथ इकट्ठा कर लिया जाता था और गिनती के दौरान ही रकम में हेरफेर किया जाता था। इसके अलावा कई कर्मचारियों की नियुक्ति आउटसोर्सिंग के माध्यम से की गई थी, जिनमें ट्रस्ट से जुड़े लोगों के रिश्तेदार और परिचित शामिल थे।

सुरक्षा व्यवस्था की विफलता भी जांच में सामने आई है, जिसमें सीसीटीवी निगरानी के बावजूद वास्तविक समय में मॉनिटरिंग की कमी और कथित तौर पर फुटेज में छेड़छाड़ या गायब होने के आरोप भी शामिल हैं।

अब ट्रस्ट ने व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए पूरी दान प्रणाली को डिजिटल और सख्त निगरानी के दायरे में ला दिया है। जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और कर्मचारियों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही हैं, और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

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