फर्रुखाबाद। जनपद में इस वर्ष मक्का का बंपर उत्पादन होने के बावजूद किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। सरकार द्वारा मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2400 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किए जाने के बाद किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन जिले में खरीद व्यवस्था पर्याप्त न होने से किसान निराश हैं।
जनपद में मक्का खरीद के लिए केवल तीन केंद्र फर्रुखाबाद, कायमगंज और राजेपुर तहसील में बनाए गए हैं। वहीं 118 ग्राम पंचायतों वाले कमालगंज विकासखंड में एक भी मक्का क्रय केंद्र स्थापित नहीं किया गया है। इससे क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है या फिर मजबूरी में स्थानीय मंडियों और व्यापारियों को कम दाम पर फसल बेचनी पड़ रही है।
किसानों का कहना है कि वर्तमान में मंडियों में मक्का करीब 2000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिक रही है, जबकि सरकार ने 2400 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। ऐसे में किसानों को प्रति क्विंटल लगभग 400 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि यदि ब्लॉक स्तर पर खरीद केंद्र खोले जाते तो उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सकता था।
किसानों ने बताया कि पिछले दो वर्षों से आलू और धान की खेती में भी उन्हें भारी घाटा झेलना पड़ा है। ऐसे में इस बार मक्का की फसल से कुछ राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन खरीद केंद्रों की कमी ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहे किसान अब औने-पौने दाम पर फसल बेचने को विवश हैं।
किसानों ने प्रशासन और शासन से मांग की है कि कमालगंज सहित अन्य प्रमुख कृषि क्षेत्रों में भी मक्का खरीद केंद्र खोले जाएं, ताकि उन्हें अपनी उपज का समर्थन मूल्य मिल सके और बिचौलियों के शोषण से राहत मिले। किसानों का कहना है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं की गई तो जिले के हजारों मक्का उत्पादक किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।


