लखनऊ। शिक्षकों और कर्मचारियों को दिए गए वेतन एवं भत्तों को लेकर नया विवाद सामने आया है। विश्वविद्यालय में के समान सुविधाएं दिए जाने के मामले में वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ लाभ शासन की स्पष्ट अनुमति के बिना प्रदान किए गए, जिसकी अब जांच की तैयारी शुरू हो गई है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय के वित्त नियंत्रक शैलेष गिरि ने संबंधित निर्णयों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज तलब किए हैं। उन्होंने कुलसचिव को पत्र भेजकर यह स्पष्ट करने को कहा है कि शिक्षकों को दिए गए अतिरिक्त लाभ और सुविधाओं का आधार क्या था तथा इन निर्णयों के लिए सक्षम स्तर से स्वीकृति प्राप्त की गई थी या नहीं।
सूत्रों के अनुसार जांच का मुख्य बिंदु यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने किन नियमों और शासनादेशों के तहत शिक्षकों को केजीएमयू के समान वेतन-भत्ते अथवा अन्य वित्तीय लाभ उपलब्ध कराए। यदि इन फैसलों के लिए आवश्यक शासन अनुमति नहीं ली गई है तो प्रशासनिक जवाबदेही तय की जा सकती है।
वित्त नियंत्रक ने पत्र के माध्यम से सभी संबंधित अभिलेख, शासनादेश, अनुमोदन पत्र और बैठक कार्यवृत्त उपलब्ध कराने को कहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द जवाब मांगा गया है ताकि पूरे प्रकरण की वस्तुस्थिति स्पष्ट हो सके।
शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि विश्वविद्यालयों में वेतन एवं भत्तों से संबंधित मामलों में वित्तीय नियमों और शासन की स्वीकृतियों का पालन अनिवार्य होता है। ऐसे में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित लाभ नियमानुसार दिए गए थे या नहीं।


