प्रशांत कटियार
लखनऊ/उत्तर प्रदेश। प्रशासनिक सेवा में अपनी नवाचारी कार्यशैली और जमीनी विकास मॉडल के लिए पहचाने जाने वाले आईएएस अधिकारी डॉ. हीरालाल ने ग्रामीण विकास और हरित क्रांति को नई दिशा देने के कार्य को राष्ट्र व्यापी बना दिया है। अपने प्रयासों के बल उन्होंने मॉडल गांव की अवधारणा को जनभागीदारी से जोड़कर ऐसा विकास मॉडल तैयार किया, जिसकी चर्चा उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में भी हो रही है।
डॉ. हीरालाल को उनकी गतिशील कार्यशैली के कारण “डायनमिक डीएम” के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण, जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ते हुए समग्र विकास की नई परिभाषा प्रस्तुत की। उनके प्रयासों से सैकड़ों गांवों में जनसहभागिता आधारित विकास कार्यों को गति मिली।
मॉडल गांव अभियान के तहत गांवों में स्वच्छता, पौधरोपण, वर्षा जल संरक्षण, सामुदायिक सहभागिता, महिला सशक्तिकरण और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। हजारों ग्रामीणों को विकास योजनाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर गांव की अवधारणा को मजबूत किया गया। उनके नेतृत्व में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाए गए, जिससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ी।
डॉ. हीरालाल लगातार जल संरक्षण और हरित विकास को लेकर देशभर में व्याख्यान दे रहे हैं। विभिन्न विश्वविद्यालयों, प्रशासनिक संस्थानों और सामाजिक मंचों पर उनके मॉडल गांव और हरित विकास के अनुभवों को सराहा जा रहा है। उनकी पुस्तकों और शोधपरक कार्यों ने भी ग्रामीण विकास के क्षेत्र में नई सोच को बढ़ावा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. हीरालाल ने प्रशासन को केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जनआंदोलन का रूप देने का प्रयास किया। यही कारण है कि उनके द्वारा विकसित मॉडल गांव की अवधारणा आज कई राज्यों में अध्ययन और अनुकरण का विषय बनी हुई है।
ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, स्वच्छ और हरित बनाने की दिशा में डॉ. हीरालाल के प्रयास नई पीढ़ी के प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन रहे हैं। हरित क्रांति, जल संरक्षण और ग्राम विकास के क्षेत्र में उनका योगदान उन्हें देश के अग्रणी नवाचारी प्रशासनिक अधिकारियों की श्रेणी में खड़ा करता है।फोटो सुझाव:
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“डॉ. हीरालाल (आईएएस) – मॉडल गांव, जल संरक्षण और हरित विकास की अवधारणा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले नवाचारी प्रशासनिक अधिकारी।”


