अयोध्या/लखनऊ। राम मंदिर में चढ़ावे की राशि को लेकर उठे विवाद ने अब नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद ने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि चढ़ावे की राशि को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई। विनय कटियार के बयान ने उस विवाद को और गहरा कर दिया है, जो पहले से ही राष्ट्रीय राजनीति और धार्मिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
पूर्व सांसद ने सवाल उठाया कि यदि मंदिर में आने वाले चढ़ावे की व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है तो फिर धनराशि को घर ले जाने जैसी परिस्थितियां क्यों बनीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले में कई बातें पहले से तय प्रतीत होती हैं और इसकी निष्पक्ष जांच होने पर कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं। कटियार ने यहां तक कहा कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो मामले में शामिल लोगों को जेल तक जाना पड़ सकता है।
राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ा कोई भी विवाद केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं रह जाता, बल्कि यह श्रद्धालुओं के विश्वास से भी जुड़ जाता है। यही कारण है कि मामले ने तेजी से राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है।


