बोले 2027 की बातें तब ही, तय करने वाले संगठन और हाईकमान के लोग
फर्रुखाबाद। जनपद के प्रभारी मंत्री एवं प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने रविवार कलेक्ट्रेट के बाहर फर्रुखाबाद से विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल का सीधा जवाब देने से बचते हुए ऐसा बयान दिया, जिसने जिले की राजनीतिक गलियारों में और संभावित नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के बाद जब पत्रकारों ने उनसे वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में फर्रुखाबाद से चुनाव लड़ने की संभावनाओं को लेकर सवाल किया तो मंत्री ने बेहद संतुलित लेकिन राजनीतिक संकेतों से भरा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि “2027 की बातें 2027 में होंगी। यह निर्णय संगठन और हाईकमान को करना है।”मना भी नहीं किया।
जयवीर सिंह का यह जवाब भले ही औपचारिक रहा हो, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे सामान्य प्रतिक्रिया मानने को तैयार नहीं हैं। आमतौर पर जब कोई नेता किसी क्षेत्र से चुनाव लड़ने की संभावना को पूरी तरह खारिज करना चाहता है तो वह स्पष्ट शब्दों में इनकार कर देता है। लेकिन जयवीर सिंह ने न तो संभावना से इनकार किया और न ही उसे स्वीकार किया। यही वजह है कि उनके बयान के बाद राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
फर्रुखाबाद में पिछले कुछ समय से भाजपा के भीतर संगठनात्मक सक्रियता और राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। प्रभारी मंत्री के लगातार जनपद दौरे, विकास कार्यों की समीक्षा और स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों में बढ़ती मौजूदगी को भी राजनीतिक विश्लेषक भविष्य की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।
भाजपा संगठन की कार्यप्रणाली को देखते हुए प्रत्याशी चयन में हाईकमान की भूमिका निर्णायक मानी जाती है। ऐसे में जयवीर सिंह का यह कहना कि फैसला संगठन और हाईकमान को करना है, राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह बयान एक तरह से भविष्य के सभी विकल्प खुले रखने का संकेत भी माना जा रहा है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन भाजपा ने कई जिलों में चुनावी तैयारियों की जमीन तैयार करना शुरू कर दिया है। ऐसे में प्रभारी मंत्री के बयान ने यह संदेश जरूर दिया है कि फर्रुखाबाद की राजनीति में आने वाले समय में नए समीकरण बन सकते हैं।
फिलहाल जयवीर सिंह ने चुनाव लड़ने के सवाल पर स्पष्टता नहीं दी है, लेकिन उनका गोलमोल जवाब जिले की राजनीति में नई बहस छेड़ गया है। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा यही है कि क्या प्रभारी मंत्री ने भविष्य की संभावनाओं के लिए दरवाजा खुला छोड़ दिया है या यह केवल एक राजनीतिक रूप से संतुलित जवाब था।
एक बात तय है कि 2027 भले अभी दूर हो, लेकिन फर्रुखाबाद की राजनीति में चुनावी चर्चाओं का आगाज अभी से शुरू हो चुका है।
और जयवीर सिंह का एक बयान जिले की सियासत में कई नए सवाल छोड़ गया है।


