– लखनऊ विश्वविद्यालय बना संघर्ष का केंद्र
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि और छात्रों के निष्कासन के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। छात्रों का अनिश्चितकालीन धरना लगातार 12वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन को अब केवल छात्रों का नहीं, बल्कि पूर्व छात्र संघ पदाधिकारियों, विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिलने लगा है। दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन अपने निर्णयों पर अडिग दिखाई दे रहा है, जिससे टकराव की स्थिति और गहराती जा रही है।
धरनास्थल पर छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार फीस में बढ़ोतरी कर उच्च शिक्षा को गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की पहुंच से दूर कर रहा है। छात्रों का कहना है कि पहले से ही महंगाई, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और छात्रावास संबंधी खर्चों का बोझ झेल रहे विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार डालना न्यायसंगत नहीं है।
आंदोलनकारी छात्रों का यह भी आरोप है कि अपनी मांगों को उठाने वाले छात्रों के खिलाफ निष्कासन जैसी कठोर कार्रवाई कर विश्वविद्यालय प्रशासन लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन कर रहा है। उनका कहना है कि विरोध करने वाले छात्रों को बातचीत के माध्यम से समाधान देने के बजाय प्रशासन दंडात्मक रवैया अपना रहा है।
आंदोलन को उस समय और बल मिला जब पूर्व छात्र संघ पदाधिकारी और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता धरनास्थल पर पहुंचे। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं विधान परिषद सदस्य Rajpal Kashyap ने छात्रों का समर्थन करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा पर बढ़ता आर्थिक बोझ युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है और छात्र हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।
लखनऊ विश्वविद्यालय का छात्र आंदोलन अब केवल फीस वृद्धि का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत और विश्वविद्यालयों में छात्र अधिकारों की बहस का प्रतीक बनता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रशासन और छात्रों के बीच जल्द संवाद स्थापित नहीं हुआ तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।
वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष है कि फीस संरचना में बदलाव संस्थान के विकास, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार के लिए आवश्यक है। प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लिए गए हैं और व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है।
फिलहाल धरना स्थल पर छात्रों का उत्साह बरकरार है। छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक फीस वृद्धि वापस लेने और निष्कासित छात्रों की बहाली को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


