मंदिर ट्रस्ट, वक्फ और राजघरानों की संपत्तियों के सौदों पर उठे गंभीर सवाल
संस्कृति मंत्री के जिले में विरासत की जमीनों पर घमासान, शासन ने मांगी रिपोर्ट
विशेष रिपोर्ट | यूथ इंडिया
फर्रुखाबाद में धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और करोड़ों की जमीनों से जुड़ा एक ऐसा मामला उभर रहा है जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मंदिर ट्रस्टों, वक्फ संपत्तियों और पुराने राजघरानों की बहुमूल्य जमीनों पर वर्षों से चल रहे विवाद अब शासन के संज्ञान में पहुंच चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार कई ऐसी संपत्तियां, जिनका उपयोग धर्मार्थ कार्यों, सार्वजनिक हित या राजपरिवारों की विरासत के रूप में होना चाहिए था, आज विवादों और कब्जों के घेरे में हैं। आरोप हैं कि प्रभावशाली लोगों और भूमाफिया नेटवर्क ने कानूनी पेचीदगियों, पुराने अभिलेखों और पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे माध्यमों का सहारा लेकर करोड़ों की जमीनों को निजी हाथों में पहुंचा दिया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिले के प्रभारी मंत्री स्वयं संस्कृति विभाग का जिम्मा संभाल रहे हैं, फिर भी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की संपत्तियों को लेकर लगातार शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं। क्या संबंधित विभागों ने समय रहते निगरानी नहीं की या फिर प्रभावशाली लोगों के दबाव में कार्रवाई ठंडी पड़ती रही?
राजस्व अभिलेखों, पुराने रजिस्ट्रेशन, ट्रस्ट रिकॉर्ड और भूमि हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग तेज हो रही है। सूत्र बताते हैं कि शासन स्तर पर कई मामलों की रिपोर्ट तलब की गई है और पुराने रिकॉर्ड खंगाले जाने की तैयारी चल रही है।
यदि जांच का दायरा बढ़ता है तो वर्षों से बंद फाइलें खुल सकती हैं। कई चर्चित संपत्तियों के स्वामित्व, कब्जे और हस्तांतरण को लेकर बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल फर्रुखाबाद में विरासत और आस्था की जमीनों पर छिड़ी यह जंग आने वाले दिनों में प्रदेश की बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक बहस बन सकती है।


