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Friday, July 31, 2026

बिना ले-आउट पास कॉलोनियों में करोड़ों का विकास कार्य? शिकायत के बाद प्रशासन की नजर

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– बड़े घोटाले की जांच की तैयारी

फर्रुखाबाद। जनपद में अवैध और बिना स्वीकृत ले-आउट वाली कॉलोनियों में कराए गए विकास कार्यों को लेकर संज्ञान हुआ है। शासन स्तर पर हुई शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की तैयारी शुरू कर दी है। आरोप है कि जिन कॉलोनियों का ले-आउट ही सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृत नहीं है, वहां नगरपालिका और अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा सड़क, नाली, सीवर लाइन, स्ट्रीट लाइट और अन्य विकास कार्यों पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए।
शिकायत के अनुसार जब किसी कॉलोनी को विधिक रूप से स्वीकृति ही प्राप्त नहीं है, तो उसमें सरकारी धन से विकास कार्य किस नियम के तहत कराए गए? यह मामला अब प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रहा है।

नगर नियोजन और कॉलोनी विकास के नियमों के अनुसार किसी भी निजी कॉलोनी को विकसित करने से पहले संबंधित प्राधिकरण से ले-आउट स्वीकृत कराना अनिवार्य होता है। इसके बाद कॉलोनाइजर को अपने खर्च पर सड़क, बिजली, ट्रांसफार्मर, जल निकासी, सीवर लाइन, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित करनी होती हैं। इन सुविधाओं के पूर्ण होने के बाद ही कॉलोनी को हस्तांतरित करने अथवा नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ प्रभावशाली कॉलोनाइजरों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को दरकिनार किया गया। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और लाभार्थियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन अब ऐसी कॉलोनियों की सूची तैयार कर रहा है जिनका ले-आउट स्वीकृत नहीं है, लेकिन वहां विकास कार्य कराए गए हैं। जांच में यह भी देखा जाएगा कि कार्यों के लिए धन किस मद से स्वीकृत हुआ, किस अधिकारी ने अनुमति दी और किन परिस्थितियों में सरकारी संसाधनों का उपयोग किया गया।

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