भरत चतुर्वेदी
मनुष्य का जीवन जितना जटिल दिखाई देता है, उतना ही सरल भी है। विडंबना यह है कि हम अक्सर उन चीजों के पीछे भागते रहते हैं जिन्हें पाने के लिए धन, शक्ति और संसाधनों की आवश्यकता होती है, जबकि जीवन की सबसे मूल्यवान संपत्तियां हमें जन्म के साथ ही प्रकृति और ईश्वर की ओर से निःशुल्क प्राप्त होती हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं—बुद्धि, धैर्य और हंसी। यदि कोई व्यक्ति इन तीनों का सही उपयोग करना सीख जाए तो वह जीवन के अधिकांश संघर्षों पर विजय प्राप्त कर सकता है।
धन, जमीन, मकान, गाड़ी और पद प्रतिष्ठा को समाज में संपत्ति माना जाता है, लेकिन इतिहास गवाह है कि इन सबके होते हुए भी अनेक लोग असफल और दुखी रहे हैं। दूसरी ओर सीमित संसाधनों वाले लोग भी अपनी बुद्धि के बल पर महान ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। बुद्धि केवल ज्ञान का नाम नहीं है, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता का नाम है। यही वह शक्ति है जो मनुष्य को अन्य प्राणियों से अलग बनाती है। बुद्धिमान व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अवसर खोज लेता है, जबकि बुद्धिहीन व्यक्ति अवसरों को भी संकट में बदल देता है।
बुद्धि के बाद यदि कोई शक्ति मनुष्य को सबसे अधिक मजबूत बनाती है तो वह है धैर्य। आज का युग त्वरित परिणामों का युग है। हर व्यक्ति तुरंत सफलता, तुरंत लाभ और तुरंत सम्मान चाहता है। लेकिन प्रकृति का नियम है कि हर बड़ी उपलब्धि समय मांगती है। बीज को वृक्ष बनने में समय लगता है, नदी को सागर तक पहुंचने में समय लगता है और मनुष्य को परिपक्व बनने में भी समय लगता है। धैर्य वह हथियार है जो बिना शोर किए सबसे बड़ी लड़ाइयां जीतता है। तलवार और बंदूक केवल बाहरी शत्रु को परास्त कर सकती हैं, लेकिन धैर्य मनुष्य को उसके भीतर के भय, क्रोध, लालच और निराशा पर विजय दिलाता है।
महात्मा गांधी से लेकर नेल्सन मंडेला तक, दुनिया के अनेक महान नेताओं ने धैर्य को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। जिन्होंने धैर्य खोया, वे अक्सर अपने ही निर्णयों के शिकार बने। इसलिए कहा जाता है कि कठिन समय में धैर्य रखना ही असली साहस है।
जीवन की तीसरी और सबसे अनमोल देन है हंसी। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी स्वीकार करता है कि हंसी तनाव को कम करती है, मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है। जिस घर में हंसी रहती है वहां दुख भी हल्के लगने लगते हैं। हंसने वाला व्यक्ति केवल स्वयं को ही नहीं, बल्कि अपने आसपास के वातावरण को भी सकारात्मक बना देता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग महंगी दवाओं, अस्पतालों और इलाज पर लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं, लेकिन हंसी जैसी प्राकृतिक औषधि को भूलते जा रहे हैं। मुस्कुराने और प्रसन्न रहने की आदत कई मानसिक और शारीरिक समस्याओं को दूर करने में मदद करती है। यही कारण है कि संत, महात्मा और आध्यात्मिक गुरु हमेशा प्रसन्नचित्त रहने की सलाह देते हैं।
वास्तव में ईश्वर ने मनुष्य को जीवन के लिए आवश्यक सबसे बड़ी पूंजी पहले ही दे दी है। बुद्धि हमें सही मार्ग दिखाती है, धैर्य उस मार्ग पर टिके रहने की शक्ति देता है और हंसी उस यात्रा को आनंदमय बनाती है। जिनके पास ये तीनों हैं, वे परिस्थितियों के मोहताज नहीं रहते। वे असफलताओं में भी सीख खोज लेते हैं, संघर्षों में भी उम्मीद देख लेते हैं और जीवन के हर क्षण को उत्सव में बदल देते हैं।
इसलिए यदि जीवन में सच्ची समृद्धि चाहिए तो धन कमाने के साथ-साथ बुद्धि को विकसित करें, धैर्य को मजबूत करें और हंसने की आदत को जीवित रखें। क्योंकि ईश्वर की ये तीन निशुल्क देन ऐसी हैं, जिनकी कीमत दुनिया का कोई खजाना नहीं चुका सकता।


