नई दिल्ली। वैश्विक रक्षा एवं सुरक्षा मामलों की प्रतिष्ठित संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की ताजा रिपोर्ट में भारत की परमाणु क्षमता को लेकर बड़ा खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पहली बार शांतिकाल में 12 परमाणु हथियारों को परिचालन स्तर पर तैनात किया है। इसके साथ ही देश के कुल परमाणु हथियारों की संख्या बढ़कर 190 हो गई है, जो पिछले वर्ष 180 थी।
रिपोर्ट के मुताबिक अब भारत के पास 12 तैनात और 178 भंडारित परमाणु हथियार हैं। यह पहली बार है जब किसी अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्था ने भारत के कुछ परमाणु हथियारों को केवल भंडारण की बजाय सक्रिय तैनाती की श्रेणी में रखा है। इससे संकेत मिलता है कि भारत अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को अधिक प्रभावी और त्वरित प्रतिक्रिया के अनुरूप विकसित कर रहा है।
सिप्री ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि भारत शांतिकाल में परमाणु हथियारों और उनके प्रक्षेपण साधनों को अलग-अलग रखता है। हालांकि मिसाइलों को कैनिस्टर प्रणाली में रखने और समुद्र आधारित प्रतिरोधक गश्त शुरू करने जैसी पहलों से संकेत मिलता है कि भारत अब कुछ परमाणु हथियारों को उनके प्रक्षेपण प्लेटफॉर्म के साथ जोड़कर रखने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रिपोर्ट में भारत की समुद्र आधारित परमाणु क्षमता के विस्तार का भी उल्लेख किया गया है। भारत ने हाल के वर्षों में परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों (SSBN) के बेड़े को मजबूत किया है। अगस्त 2024 के बाद आईएनएस अरिघात और आईएनएस अरिदमन जैसी अत्याधुनिक पनडुब्बियों को परिचालन सेवा में शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि भारत ने इनमें से किसी एक पनडुब्बी पर सीमित संख्या में परमाणु हथियार तैनात करने की शुरुआत भी कर दी है।


