नई दिल्ली। बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल और एशिया में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत ने अपनी परमाणु रणनीति में बड़ा कदम उठाया है। अंतरराष्ट्रीय शोध संस्था SIPRI की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियारों को सक्रिय तैनाती की श्रेणी में रखा है। रिपोर्ट सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय रक्षा और कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 तक भारत के किसी भी परमाणु हथियार को तैनात श्रेणी में नहीं माना गया था, लेकिन 2026 में यह संख्या बढ़कर 12 हो गई है। साथ ही भारत के कुल परमाणु हथियारों का अनुमानित भंडार भी बढ़कर करीब 190 तक पहुंच गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि भारत की सुरक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण संकेत है। चीन की लगातार बढ़ती सैन्य शक्ति, पाकिस्तान की परमाणु क्षमता और एशिया में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच भारत अपनी प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
भारत लंबे समय से “विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता” और “पहले उपयोग नहीं” की नीति पर चलता रहा है। लेकिन ताजा रिपोर्ट बताती है कि देश अब केवल परमाणु हथियार रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता भी विकसित कर रहा है।
दुनिया के कई देशों में इस समय परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण की दौड़ चल रही है। SIPRI की रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों की होड़ एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। ऐसे में भारत का यह कदम उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।


