– डीसीपी ईस्ट समेत कई पुलिस अफसर तलब
लखनऊ/यूथ इंडिया। राजधानी लखनऊ में नाबालिग बच्चियों और महिलाओं के लगातार लापता होने के मामलों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक 12 वर्षीय किशोरी की बरामदगी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए डीसीपी ईस्ट, ईस्ट जोन के क्षेत्राधिकारी और संबंधित थाना प्रभारी को तलब कर लिया है।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर लखनऊ से भी शहर में लापता लड़कियों और महिलाओं का विस्तृत आंकड़ा प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
सुनवाई के दौरान सामने आए आंकड़ों ने भी चिंता बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार केवल नौ थाना क्षेत्रों में 81 महिलाएं और बच्चियां लापता दर्ज की गईं, जिनमें से 66 की बरामदगी हो चुकी है, जबकि 15 महिलाएं और बच्चियां अभी भी लापता हैं। आशंका जताई गई है कि इनमें से कई मामलों में अपहरण या बहला-फुसलाकर ले जाने की घटनाएं शामिल हो सकती हैं।
अदालत ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को 10 जून को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। कोर्ट यह जानना चाहता है कि लापता बच्चियों की तलाश और बरामदगी के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं तथा शेष मामलों में जांच किस स्थिति में है।
प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच हाईकोर्ट की यह सख्ती महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत का संदेश साफ है कि लापता बच्चियों और महिलाओं के मामलों को सामान्य गुमशुदगी मानकर नहीं छोड़ा जा सकता और पुलिस को जवाबदेह बनना होगा।


