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Sunday, June 7, 2026

पांच दशक तक चिकित्सा सेवा, समाजसेवा और मानवता की मिसाल रहीं डॉ. सरीन, एक करुणा के युग का अंत, रो पड़ा फर्रुखाबाद

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शरद कटियार

फर्रुखाबाद। जनपद की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, समाजसेवी, शिक्षाविद् और भाजपा की वरिष्ठ नेता डॉ. रजनी सरीन का निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे फर्रुखाबाद समेत उत्तर प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। लंबे समय तक चिकित्सा और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहीं डॉ. सरीन को शहर में लोग प्यार से “भाभी जी” और “डॉक्टर मैडम” के नाम से जानते थे। लखनऊ अजंता हॉस्पिटल एवं आई वी एफ सेंटर की निदेशक डॉ गीता खन्ना समेत राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख पूर्व सांसद विनय कटियार वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, सांसद रमेश अवस्थी मुकेश राजपूत और प्रमुख रूप से गृह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपूर्णनीय क्षति करार दिया है।

अंतिम सांस तक निभाया सेवा का धर्म

डॉ. रजनी सरीन का जीवन सेवा, करुणा और समर्पण का पर्याय था। गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद उन्होंने मरीजों की सेवा नहीं छोड़ी। बताया जाता है कि निधन से मात्र एक दिन पूर्व तक उन्होंने अपने निःशुल्क रविवार क्लीनिक में सौ से अधिक मरीजों का उपचार किया। जीवन की अंतिम घड़ी तक वे समाज की सेवा में समर्पित रहीं।

हजारों परिवारों के जीवन से जुड़ा था उनका नाम

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने पांच दशक से अधिक समय तक स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के रूप में सेवाएं दीं। उनके हाथों हजारों बच्चों का जन्म हुआ और पीढ़ियों तक परिवारों का उपचार हुआ। फर्रुखाबाद और आसपास के क्षेत्रों में हजारों लोग आज भी उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते थे।

बाढ़ पीड़ितों से लेकर गरीब मरीजों तक पहुंचाई मदद

वर्ष 1972 से उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं चिकित्सा सेवाएं शुरू कीं। 1980 से विशाल चिकित्सा शिविरों के माध्यम से प्रतिवर्ष हजारों जरूरतमंदों को स्वास्थ्य लाभ दिलाया। प्रत्येक माह के पहले रविवार को वे निःशुल्क परामर्श देती थीं। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने गांव-गांव दवा किट पहुंचाकर लोगों की मदद की।

महिला स्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान में निभाई अग्रणी भूमिका

महिला भ्रूण हत्या रोकने, परिवार नियोजन, दिव्यांग पुनर्वास, नेत्र चिकित्सा शिविर, कैंसर जांच अभियान और कृत्रिम अंग वितरण जैसे अनेक सामाजिक अभियानों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अस्पताल में परित्यक्त 23 बच्चों को गोद दिलाने में भी उन्होंने विशेष योगदान दिया। वर्ष 2018 में स्थापित उनकी निःशुल्क सामुदायिक रसोई आज भी जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध करा रही है।

चिकित्सक ही नहीं, साहित्य और समाज की थीं सशक्त हस्ताक्षर

डॉ. सरीन एक कुशल चिकित्सक के साथ-साथ कवयित्री, लेखिका, चित्रकार और शिक्षाविद् भी थीं। उन्होंने हिंदी साहित्य में योगदान दिया, अनेक लेख लिखे और दो पुस्तकों का प्रकाशन कराया। अभिव्यंजना एवं रेडक्रॉस सोसायटी का नेतृत्व करने के साथ-साथ चंद्रकांता रायजादा इंटर कॉलेज, शमसाबाद की अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।

परिवार आगे बढ़ाएगा सेवा का मिशन

अपने पीछे वे पुत्री डॉ. पायल सरीन नांगिया, डॉ. कोयल खन्ना तथा पुत्र डॉ. अंकित सरीन सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। परिवार ने संकल्प लिया है कि सरीन नर्सिंग होम के माध्यम से डॉ. रजनी सरीन के सेवा कार्यों और मानवीय मिशन को आगे बढ़ाया जाएगा।

एक युग का अंत, लेकिन प्रेरणा रहेगी अमर

डॉ. रजनी सरीन का निधन केवल एक परिवार की नहीं बल्कि पूरे फर्रुखाबाद की क्षति है। शहर ने अपनी एक लोकप्रिय चिकित्सक, समाज ने एक सेवाभावी व्यक्तित्व और हजारों मरीजों ने अपना संरक्षक खो दिया है। उनके द्वारा किए गए सेवा कार्य और मानवीय योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।

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