फर्रुखाबाद। संस्कार भारती की ग्रीष्मावकाश कला संस्कृति कार्यशाला में लोक कला के माध्यम से बच्चों को भारतीय लोक जीवन का आनंद सिखाया जा रहा है। प्रशिक्षिका रजनी लौगवानी और कोमल शर्मा के मार्गदर्शन में बच्चे लोक नृत्य, लोक गायन और लोक संगीत के जरिए तनाव मुक्त जीवन जीने की कला सीख रहे हैं।
प्रशिक्षिकाओं का कहना है कि वर्तमान समय में लोगों की जीवनशैली जटिल हो गई है, लेकिन लोक कला के माध्यम से लोग तनाव मुक्त जीवन जी सकते हैं। कार्यशाला में बच्चों के उत्साह और उमंग के साथ लोक नृत्य सिखाया जा रहा है। लोक नृत्य के साथ-साथ गुजरात का परंपरागत डंडिया नृत्य और सिंधियत शौली में डंडिया नृत्य की बारीकियों के साथ भाव नृत्य कला की भी शिक्षा दी जा रही है। कार्यशाला में बच्चे लोक नृत्य, लोक गायन और संगीत के माध्यम से लोक जीवन का आनंद बिखेर रहे हैं। संस्कार भारती का उद्देश्य बच्चों को भारतीय लोक संस्कृति से जोड़कर उन्हें आत्मविश्वास और सृजनात्मकता देना है।
कार्यशाला की व्यवस्था अनुराग अग्रवाल ,गौरव मिश्रा बंटी, अरविंद दीक्षित, कुलभूषण श्रीवास्तव ,नरेंद्र नाथ मिश्रा, रविंद्र भदोरिया ,आदेश अवस्थी आदि लोगदेख रहे हैं।
लोक कार्यशाला बन गया संस्कार भारती का शिविर, बच्चे सीख रहे लोक नृत्य


