– ज्ञानेंद्र सिंह छोटे, पवन कटियार,समेत करोड़ों के काले खेल में शामिल लोगों को नोटिस
– सुरेश अग्रवाल, आयुष रस्तोगी, रवि रस्तोगी जैसे बड़े नामों पर बड़ी तैयारी
फर्रुखाबाद। वर्षों से कृषि भूमि को आवासीय कॉलोनियों में बदलकर करोड़ों रुपये के राजस्व की कथित चोरी करने वालों पर अब प्रशासन का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर की सख्ती और नगर मजिस्ट्रेट पारुल तरार के एक्शन मोड में आने के बाद जिले में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू हो गया है। प्रशासन ने कई चर्चित नामों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। पूर्व में जारी नोटिसों के मामलों में शीघ्र बुलडोजर गरजेगा ध्वस्तीकरण की पत्रावलियां तैयार हो रही हैं।
सूत्रों के अनुसार थाना मऊदरवाजा क्षेत्र के अर्राह पहाड़पुर स्थित मंडी समिति के आसपास बड़े पैमाने पर बिना स्वीकृत ले-आउट और मानचित्र के प्लाटिंग किए जाने की शिकायतों के बाद कार्रवाई शुरू हुई। नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय से जारी नोटिसों में विश्व क्षत्रिय संगठन से जुड़े ज्ञानेंद्र सिंह छोटे, घनश्याम, प्रेमचंद और सुशील कुमार समेत कई लोगों से नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।ये लोग बीजेपी और सत्ता से जुड़े रहकर आड़ में ज़मीनों का कारोवार करते बताये गए हैं।
प्रशासन की कार्रवाई केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। दिलावल क्षेत्र में विकसित की जा रही सृष्टि एनक्लेव से जुड़े लोगों, अजमतपुर निवासी अजीत सिंह,ढीलावल निवासी ठाकुर मोनू सिंह, अभय सिंह, गोपाल सिंह, अन्य लोगों तथा सिंधी कॉलोनी निवासी अवधेश चौहान और थाना कादरीगेट क्षेत्र के खानपुर निवासी श्याम बाबू एवं सुरेंद्र सिंह सोमवंशी को भी नोटिस जारी किए गए हैं ।
राजस्व विभाग के जानकारों के अनुसार किसी भी कृषि भूमि को आवासीय कॉलोनी में विकसित करने के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन, ले-आउट स्वीकृति, विकास शुल्क और विभिन्न विभागों की अनुमति आवश्यक होती है। यदि इन प्रक्रियाओं को दरकिनार कर प्लाटिंग की जाती है तो इससे सरकार को लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है।
प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि नोटिस जारी होने के बाद यदि संबंधित पक्ष निर्धारित समय के भीतर वैध अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर पाए तो अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है। यही कारण है कि जिले में अवैध कॉलोनियां विकसित करने वाले लोगों के बीच हड़कंप की स्थिति है।
सबसे अधिक चर्चा अब उस कथित नेटवर्क को लेकर है, जिस पर लंबे समय से शहर की बहुमूल्य जमीनों पर खेल कर करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे करने के आरोप लगते रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि आयुष रस्तोगी से जुड़े मामलों की भी प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा की जा रही है। हालांकि इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
फर्रुखाबाद में पिछले एक दशक के दौरान शहर और उसके आसपास सैकड़ों बीघा कृषि भूमि पर बिना समुचित स्वीकृतियों के कॉलोनियां विकसित होने के आरोप लगते रहे हैं। यदि प्रशासन ने सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई तो करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान और भूमि विनियमन से जुड़े बड़े तथ्य सामने आ सकते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन क्षेत्रों में वर्षों से प्लाटिंग कर भूखंड बेचे जा रहे थे, वहां संबंधित विभागों की निगाह अब तक क्यों नहीं पहुंची? और यदि अवैध प्लाटिंग हो रही थी तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी?
फिलहाल जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के निर्देशों के बाद शुरू हुई कार्रवाई ने साफ संकेत दे दिया है कि अब बिना स्वीकृति कॉलोनी विकसित करने वालों के लिए आने वाले दिन आसान नहीं होने वाले हैं।
“शहर की जमीनों पर वर्षों से चल रहे ‘प्लाटिंग उद्योग’ पर प्रशासन की नजर पड़ते ही कई रसूखदार चेहरों की बेचैनी बढ़ गई है। अब देखना यह है कि कार्रवाई नोटिसों तक सीमित रहती है या अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर भी चलता है।”


