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Tuesday, June 2, 2026

शहर विकास की आड़ में भ्रष्टाचार का खेल? करोड़ों के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भगवान भरोसे

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– जनप्रतिनिधि विहीन विधानसभा में दागी ठेकेदारों को बल्ले बल्ले
– खुलेआम सरकारी ट्रस्ट हो रहे कब्जे
– थानो चौकियों में आम जनता की नहीं खास लोगों की होती सुनवाई
फर्रुखाबाद। शहर में चल रहे करोड़ों रुपये के सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सड़क निर्माण हो, नाला निर्माण, इंटरलॉकिंग, सीसी रोड, जल निगम की परियोजनाएं या अन्य विकास कार्य लगभग हर विभाग के निर्माण कार्यों पर जनता उंगली उठा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरकारी धन से बनने वाले इन कार्यों की निगरानी कौन कर रहा है? जन प्रतिनिधि विहीन किस विधानसभा में सरकारी कर्मियों और राजस्व कर्मियों की खुली मनमानी आम हो चुकी पुलिस थानो,चौकिया में आम जनमानस की कम खास की ज्यादा सुनी जा रही है।

सातनपुर मंडी रोड का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा है कि शहर में चल रहे अन्य निर्माण कार्यों को लेकर भी लोगों की शिकायतें सामने आने लगी हैं। मंडी रोड पर निर्माण की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों ने जिस तरह काम रुकवाकर मौके पर जांच कराई, उसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जनता खुद सड़क की मोटाई नापने को मजबूर हो जाए तो यह स्थिति किसी भी विभाग के लिए शर्मनाक मानी जाएगी।
शहरवासियों का आरोप है कि कई निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी कर केवल कागजों पर गुणवत्ता दिखाई जाती है। मौके पर सामग्री की गुणवत्ता, निर्माण की मोटाई और तकनीकी मानकों का पालन अक्सर सवालों के घेरे में रहता है। आरोप यह भी है कि निर्माण पूरा होने से पहले ही कई परियोजनाओं में दरारें और टूट-फूट दिखाई देने लगती हैं।
जनता के बीच यह चर्चा भी आम है कि ठेकेदारी व्यवस्था में कमीशनखोरी की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि गुणवत्ता सबसे अंतिम प्राथमिकता बनकर रह गई है। सरकार करोड़ों रुपये विकास कार्यों पर खर्च कर रही है, लेकिन यदि उसका बड़ा हिस्सा रास्ते में ही कमीशन और अनियमितताओं की भेंट चढ़ जाए तो जनता तक विकास की वास्तविक तस्वीर कैसे पहुंचेगी?
विडंबना यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई और गुणवत्ता युक्त विकास कार्यों की बात करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई विभागों में तस्वीर अलग दिखाई देती है। यदि निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या विभागीय इंजीनियरों, संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय होगी? या फिर हर बार की तरह कुछ दिनों तक चर्चा होगी और फिर मामला फाइलों में दब जाएगा?
फर्रुखाबाद की जनता अब केवल सड़क, नाला और भवन नहीं चाहती, बल्कि वह अपने टैक्स के पैसे से होने वाले कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता भी चाहती है। क्योंकि विकास केवल निर्माण से नहीं, बल्कि टिकाऊ और ईमानदार निर्माण से दिखाई देता है।

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