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Tuesday, June 2, 2026

जिस रेप मामले को जोरो से उठा रहे थे उसी में फंसे AAP नेता, पीड़िता की पहचान उजागर करने के आरोप में सौरभ भारद्वाज पर FIR

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नई दिल्ली: जनकपुरी में एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले को लेकर AAP नेता सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bhardwaj) अब स्वयं कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं। पीड़िता की पहचान सोशल मीडिया पर उजागर करने के आरोप में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के अनुसार, इस संबंध में जनकपुरी थाना में FIR दर्ज की गई है।

पुलिस ने मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), किशोर न्याय अधिनियम और POCSO अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री के माध्यम से पीड़िता की पहचान सार्वजनिक हो गई, जो कानूनन प्रतिबंधित है। विशेष रूप से POCSO मामलों में पीड़ित बच्चे की पहचान उजागर करना गंभीर अपराध माना जाता है।

FIR के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि 11 मई 2026 को सौरभ भारद्वाज ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें कथित तौर पर नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली जानकारी और स्क्रीनशॉट सार्वजनिक किए गए। शिकायत में कहा गया है कि पोस्ट में बच्चे के नाम और अन्य विवरणों का उल्लेख था, जिससे उसकी पहचान सामने आने की आशंका थी।

शिकायतकर्ता का दावा है कि इस तरह की जानकारी साझा करना नाबालिग पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखने संबंधी कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन हो सकता है। दिल्ली पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS), किशोर न्याय अधिनियम और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह की जानकारी सार्वजनिक करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि इससे बच्चे और उसके परिवार की निजता तथा मानसिक सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यौन अपराधों से जुड़े मामलों में नाबालिग पीड़ितों की पहचान को गोपनीय रखना कानूनन अनिवार्य है। ऐसे मामलों में नाम, तस्वीर, पता, स्कूल या कोई भी ऐसी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती, जिससे पीड़ित की पहचान उजागर होने की संभावना हो।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायतकर्ता प्रवीण नारायण द्वारा उपलब्ध कराए गए स्क्रीनशॉट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। प्रारंभिक जांच में पर्याप्त आधार मिलने के बाद जनकपुरी थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया। FIR में POSCO अधिनियम की धारा 23(4), किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 72 के तहत आरोप शामिल किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, यह FIR 24 मई को दर्ज की गई थी। दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट, संबंधित अकाउंट्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की जा रही है।

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