बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में आखिरकार वह क्षण आ गया जिसकी चर्चा पिछले कई महीनों से लगातार हो रही थी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और राज्यपाल द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद पूरी कैबिनेट भंग कर दी गई है। इसके साथ ही राज्य में कांग्रेस सरकार के भीतर नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
सूत्रों के अनुसार शनिवार शाम चार बजे बेंगलुरु में होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक अब औपचारिकता भर मानी जा रही है। बैठक में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को विधायक दल का नेता चुना जाएगा और इसके बाद उनके मुख्यमंत्री बनने की घोषणा होने की पूरी संभावना है।
कांग्रेस के भीतर लंबे समय से सत्ता के “ढाई-ढाई साल” फॉर्मूले को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यह बदलाव हुआ है। पार्टी हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद सिद्धारमैया ने पद छोड़ने का फैसला लिया। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का पालन किया है।
डीके शिवकुमार के समर्थकों में इस घटनाक्रम के बाद उत्साह का माहौल है। बेंगलुरु समेत कई क्षेत्रों में समर्थकों ने जश्न मनाया और इसे कांग्रेस संगठन तथा सरकार के बीच नए संतुलन की शुरुआत बताया।
हालांकि सत्ता परिवर्तन के साथ कांग्रेस के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी हैं। नई कैबिनेट के गठन, क्षेत्रीय और जातीय संतुलन, तथा सिद्धारमैया खेमे और शिवकुमार समर्थकों के बीच सामंजस्य बनाए रखना नई सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी बदलने के बाद भी कांग्रेस को आंतरिक शक्ति संतुलन संभालना होगा।
कर्नाटक की राजनीति अब नए दौर में प्रवेश करती दिख रही है, जहां डीके शिवकुमार के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार की दिशा और रणनीति दोनों पर देशभर की निगाहें टिकी रहेंगी।


