यूथ इंडिया | लखनऊ
उत्तर प्रदेश की पंचायत राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाए जाने के प्रस्ताव पर काम कर रही है और संभव है कि जल्द ही इस संबंध में आदेश जारी कर दिया जाए।
राजधानी में मीडिया से बातचीत के दौरान राजभर ने संकेत दिए कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने और नई व्यवस्थाओं के बीच विकास कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए सरकार व्यावहारिक समाधान तलाश रही है। उन्होंने कहा कि गांवों में चल रही योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों को बिना बाधा जारी रखने के उद्देश्य से मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासकीय जिम्मेदारी सौंपने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
राजभर के बयान के बाद प्रदेश की पंचायत राजनीति में हलचल तेज हो गई है। ग्राम प्रधानों के बीच इस बयान को राहत के रूप में देखा जा रहा है, जबकि कई राजनीतिक दल इसे आगामी पंचायत चुनावों की रणनीति से जोड़कर भी देख रहे हैं। यदि सरकार यह फैसला लागू करती है तो प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों में वर्तमान प्रधान ही प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रख सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार सरकार को आशंका है कि यदि पंचायतों में प्रशासक नियुक्ति को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई तो गांवों में विकास कार्य, भुगतान प्रक्रिया, सफाई व्यवस्था, पेयजल योजनाएं और अन्य सरकारी योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। यही वजह है कि प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए प्रधानों को ही जिम्मेदारी देने का विकल्प सबसे व्यावहारिक माना जा रहा है।
हालांकि इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद भी गहराने की संभावना है। विपक्षी दल सरकार पर पंचायत चुनावों को प्रभावित करने और सत्ता समर्थित प्रधानों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगा सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत स्तर पर प्रशासक नियुक्ति का फैसला ग्रामीण राजनीति पर सीधा असर डाल सकता है।
फिलहाल प्रदेशभर के पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बयान के बाद यह लगभग साफ माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो पंचायत प्रशासन की मौजूदा तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।


