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Sunday, May 24, 2026

पांच महीने की कानूनी लड़ाई के बाद सपा के ललित तिवारी बने पार्षद, हाईकोर्ट के आदेश पर दिलाई गई शपथ

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राजधानी Lucknow में नगर निगम के 66 साल के इतिहास में पहली बार कोर्ट के आदेश पर किसी पार्षद को शपथ दिलाई गई। फैजुल्लागंज तृतीय वार्ड से समाजवादी पार्टी के नेता ललित तिवारी को रविवार को पार्षद पद की शपथ दिलाई गई। महापौर Sushma Kharkwal ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह मामला पिछले पांच महीनों से कानूनी और राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में बना हुआ था।

फैजुल्लागंज तृतीय वार्ड में नगर निकाय चुनाव के दौरान भाजपा उम्मीदवार प्रदीप शुक्ला टिंकू विजयी घोषित हुए थे, जबकि सपा के ललित तिवारी दूसरे स्थान पर रहे थे। दोनों उम्मीदवारों के बीच करीब 1700 वोटों का अंतर था। चुनाव परिणाम आने के बाद ललित तिवारी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया कि प्रदीप शुक्ला टिंकू ने अपने शपथ पत्र में वैवाहिक स्थिति को लेकर गलत जानकारी दी है। मामले की सुनवाई के बाद अपर जिला जज की अदालत ने प्रदीप शुक्ला का निर्वाचन निरस्त करते हुए ललित तिवारी को निर्वाचित घोषित कर दिया।

निर्वाचित घोषित होने के बावजूद ललित तिवारी को लंबे समय तक शपथ नहीं दिलाई गई। इसके लिए उन्होंने नगर निगम, जिलाधिकारी, मंडलायुक्त कार्यालय और शासन स्तर तक लगातार पत्राचार किया। जब इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने शपथ ग्रहण कराने के स्पष्ट निर्देश दिए, लेकिन आदेश के पालन में देरी होने पर 21 मई को अदालत ने महापौर Sushma Kharkwal के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए। इसी दौरान महापौर अस्पताल में भर्ती रहीं और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देती रहीं। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद रविवार को उन्होंने शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी कराई।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। भाजपा के कुछ पार्षदों और नेताओं ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस प्रकार रामपुर में अब्दुल्ला आजम मामले में दोबारा चुनाव कराया गया था, उसी तरह यहां भी पुनर्मतदान होना चाहिए था। भाजपा पार्षद अनुराग मिश्रा ने भी हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए दोबारा चुनाव कराने की मांग उठाई। वहीं महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि उन्होंने न्यायालय के आदेश का पालन किया है, लेकिन उनकी व्यक्तिगत राय में वार्ड में दोबारा चुनाव होना चाहिए था क्योंकि प्रदीप शुक्ला को अधिक मत मिले थे। दूसरी ओर सपा समर्थकों ने इसे न्याय और लोकतंत्र की जीत बताया है।

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